आजमगढ़

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लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (मुख्यालय, 4-ए गोखले मार्ग) से दिनांक 20.02.2026 को जारी पत्रांक 76/…/आहरण एवं वितरण ने फेस अटेंडेंस विवाद को औपचारिक रूप दे दिया है। विषय स्पष्ट है—ERP पोर्टल पर Clock-In/Clock-Out Details के आधार पर On Duty Certificate Generate कराने संबंधी निर्देश।

पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में ERP/ESS अटेंडेंस के अनुसार वेतन निर्गमन की कार्यवाही की जा रही है। जिन कर्मचारियों की Clock-In/Clock-Out डिटेल्स में किसी कारणवश Absent/Late/Early Exit प्रदर्शित हो रहा है, वे संबंधित अवधि के लिए Create On Duty Certificate बनाकर सक्षम अधिकारी से 21.02.2026 सायं 05:00 बजे तक अनुमोदित कराएं। इसके बाद वेतन संबंधी प्रक्रिया शुरू होने पर किसी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा।

हस्ताक्षरकर्ता—अनुज गुप्ता, अधिशासी अभियंता एवं आहरण वितरण अधिकारी—ने इसे “अति महत्वपूर्ण/समयबद्ध” श्रेणी में जारी किया है।

कर्मचारियों के आरोप और आदेश का मेल

हाल में कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि सुबह 10 बजे फेस अटेंडेंस न होने पर ERP/ESS से सीधे वेतन कटेगा। अब जारी पत्र से यह स्पष्ट है कि वेतन प्रक्रिया वास्तव में ERP अटेंडेंस से लिंक कर दी गई है। यानी सिस्टम में Absent/Late दिखा तो कर्मचारी को स्वयं On Duty Certificate जनरेट कराकर बचाव करना होगा—अन्यथा वेतन पर सीधा असर।

जमीनी हकीकत बनाम डिजिटल रिकॉर्ड

बिजली आपूर्ति 24×7 आवश्यक सेवा है। फील्ड में रात्रि ड्यूटी, ब्रेकडाउन, ट्रिपिंग और आपातकालीन बहाली के दौरान Clock-In/Clock-Out समय का अंतर स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठ रहा है—

  • क्या फील्ड ड्यूटी का स्वतः समायोजन ERP में है?

  • क्या रात्रि ड्यूटी के बाद विश्राम अवधि को सिस्टम मान्यता देता है?

  • क्या हर कर्मचारी के पास समयबद्ध “On Duty Certificate” बनाने की प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध है?

“पहले सिस्टम, बाद में सुनवाई?”

पत्र की भाषा साफ है—निर्धारित समय सीमा के बाद वेतन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और संशोधन संभव नहीं होगा। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उल्टा भार उन पर डाल दिया गया है: पहले सिस्टम Absent दिखाएगा, फिर कर्मचारी प्रमाणपत्र बनाकर खुद को “साबित” करेगा।

प्रबंधन की मंशा बनाम कर्मचारी असंतोष

प्रबंधन अनुशासन और पारदर्शिता की बात कर रहा है, जबकि कर्मचारी इसे “डिजिटल दबाव” मान रहे हैं। यदि ERP आधारित वेतन निर्गमन में फील्ड ड्यूटी, ट्रैफिक, आपातकालीन कॉल और रविवार कार्य जैसी वास्तविक परिस्थितियों का समुचित प्रावधान नहीं हुआ, तो यह विवाद और गहरा सकता है।

UPPCL Media इस मुद्दे पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा में है—क्या व्यवस्था में व्यावहारिक लचीलापन जोड़ा जाएगा, या “Clock-In/Clock-Out” ही वेतन का अंतिम निर्णायक रहेगा?

AZMI DESK

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