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सुप्रीम कोर्ट ने रूह अफजा को माना फ्रूट ड्रिंक, अब 12.5 प्रतिशत नहीं सिर्फ 4 प्रतिशत टैक्स देगा हमदर्द

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (25 फरवरी, 2026) को एक फैसले में कहा है कि शरबत रूह अफजा को एक फ्रूट ड्रिंक माना जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि मार्केटिंग लेबल किसी उत्पाद की टैक्स कैटेगरी निर्धारित नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि ‘रूह अफजा’ एक फल आधारित पेय पदार्थ है जिसे पानी या दूध में मिलाकर पतला करके पिया जाता है. कोर्ट ने कहा कि इस पर वैट (Value Added Tax) की दर 12.5 प्रतिशत नहीं, बल्कि कम दर वाला 4 प्रतिशत वैट लागू होगा.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि हमदर्द (WAKF) के शरबत रूह अफजा को उत्तर प्रदेश वैट एक्ट के तहत फ्रूट ड्रिंक की श्रेणी में रखा जाए. उन्होंने कहा कि भले ही इसे शरबत के रूप में बेचा जाता है, जिन पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है, लेकिन इसे फ्रूट ड्रिंक ही माना जाए और 4 प्रतिशत टैक्स कैटेगरी में रखा जाए.

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा, ‘एक बार यह सिद्ध हो जाने पर कि उत्पाद फलों से बना पेय पदार्थ है जिसका पतला करके सेवन किया जाना है, तो इसे एंट्री 103 के अंतर्गत फ्रूट ड्रिंक के रूप में वर्गीकृत करने का उचित और ठोस आधार बनता है.’ बेंच ने हमदर्द लेबोरेटरीज की अपील को स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें रूह अफजा को 12.5 प्रतिशत ​​की वैट दर के तहत रखा गया था.

रूह अफजा को लेकर मुद्दा ये था कि इसमें 10 प्रतिशत फलों का रस, हर्बल अर्क और चीनी सिरप होता है तो इस पर टैक्स फ्रूट ड्रिंक के तौर पर लगाया जाए या अनक्लासीफाइड आइटम्स की तरह 12.5 प्रतिशत वैट लगाया जाए. इनकम टैक्स अधिकारियों ने इसके लेबल पर दी गई जानकारी कि यह नॉन-फ्रूट सिरप या शरबत है, इसको खाद्य नियमों के तहत उच्च दर वाले आइटम्स में वर्णित किए जाने के आधार पर 12.5 प्रतिशत ​​वैट लगाने को उचित ठहराया. 

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि किसी उत्पाद के टैक्स वर्गीकरण में उसका असली व्यवसायिक और वास्तिवक स्वरूप मायने रखता है. न कि सिर्फ उसका मार्केटिंग लेबल या नाम. कोर्ट ने आवश्यक विशेषता टेस्ट लागू करते हुए माना कि भले ही रूह अफजा में शुगर सिरप मात्रा में अधिक है, लेकिन यह एक कैरियर और प्रीजरवेटिव के रूप में काम करता है. भले ही इनवर्ट शुगर सिरप की मात्रा लगभग 80 प्रतिशत होती है, लेकिन इसका मुख्य काम ड्रिंक में मिठास बढ़ाना है और यह उसकी व्यावसायिक या पेय पहचान निर्धारित नहीं करता है. 

उन्होंने कहा कि इसका स्वाद, फ्लेवर और पेय गुण फलों के रस और उससे प्राप्त आसुत पदार्थों से आते हैं, जो मिलकर उत्पाद को एक सुगंधित शरबत के रूप में विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं.  कोर्ट ने कहा कि इसका वर्गीकरण उस घटक के आधार पर होना चाहिए जो इसको उसका आवश्यक पेय गुण प्रदान करता है. इसके अलावा, कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि कई राज्यों, जैसे दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश ने रूह अफजा को फल आधारित फ्रूट ड्रिंक की श्रेणी में रखा है.

AZMI DESK

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