लुधियाना डिजिटल अरेस्ट मामला, ED ने 1.76 करोड़ रुपये फ्रीज किए, जानें कैसे हो गई 7 करोड़ की ठगी

ED के जालंधर जोनल ऑफिस की ने 14 फरवरी 2026 को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.76 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस को अस्थायी तौर पर अटैच कर दिया है. ये कार्रवाई PMLA के तहत की गई है. ये जांच लुधियाना के साइबर क्राइम थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि कारोबारी एस. पी. ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 7 करोड़ रुपये की ठगी की गई.
खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर वसूले पैसे
आरोप है कि ठगों ने खुद को CBI का अधिकारी बताकर ओसवाल से पैसे वसूले. डर और कानूनी कार्रवाई का हवाला देकर उनसे रकम ट्रांसफर कराई गई. ED के मुताबिक, ठगी की रकम को कई दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खाते के जरिए घुमाया गया.
जांच में सामने आया कि आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर इन खातों को ऑपरेट कर रहे थे. 28 अगस्त 2024 को आठ अन्य साइबर क्राइम से जुड़े पैसे भी मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स (M/s Frozenman Warehousing and Logistics) के खाते में डाले गए.
रूमी कलिता ने अतनु चौधरी के साथ मिलकर इसी फर्म के बैंक खाते का इस्तेमाल अवैध रकम को साफ दिखाने के लिए किया. मेसर्स रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में भी संदिग्ध रकम क्रेडिट हुई.
ईडी की जांच में और क्या सामने?
जांच में ये भी पता चला कि कुछ रकम को शेल कंपनियों के जरिए अलग अलग घुमाकर विदेश भेजा गया. इसके लिए ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया. बाकी पैसे से वर्चुअल डिजिटल एसेट (क्रिप्टो आदि) खरीदे गए.
ED ने जिस 1.76 करोड़ रुपये को फ्रीज़ किया है. वो रकम मेसर्स मृत्युंज्य मल्टीट्रेड नाम की एक म्यूल कंपनी के बैंक खाते में पड़ी थी. एजेंसी के मुताबिक ये खाता अलग-अलग साइबर ठगी के पैसों को रिसीव और आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
जांच में ये भी सामने आया कि कई म्यूल अकाउंट गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खुलवाए गए. उन्हें लोन दिलाने या नौकरी देने का झांसा देकर उनके दस्तावेज लिए गए और बैंक खाते खुलवाकर ठगी के पैसे घुमाए गए.
साल 2025 में ईडी ने की थी छापेमारी
इस केस में ED ने 31 जनवरी 2025, 22 दिसंबर 2025 और 31 दिसंबर 2025 को अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी. आरोपी रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया. अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया. दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में है. ED का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. एजेंसी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े है.


