राज्य

बिहार में होगी शराबबंदी कानून की समीक्षा? RLM विधायक की मांग पर JDU ने साफ किया रुख

बिहार में 2016 से शराबबंदी कानून लागू है. लगभग 10 साल हो चुके हैं और इस बीच एक बार फिर से इस कानून की समीक्षा को लेकर विवाद शुरू हो गया है. मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को सदन में एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने मांग उठाई कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए. माधन आनंद की इस मांग के बाद प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है. हालांकि जेडीयू ने अपना रुख साफ कर दिया है.

जेडीयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने अपने गठबंधन के साथी विधायक का नाम नहीं लिया लेकिन खूब निशाना साधा. अभिषेक झा ने कहा सरकार के द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा होती रही है. शराबंबदी की भी समीक्षा होती रही है. एक विधायक ने सदन में बयान दिया है कि समीक्षा होनी चाहिए. अब समीक्षा का मतलब क्या है उनके हिसाब से क्या है ये तो वही बता सकते हैं. 

‘जो लोग बयान दे रहे हैं उनका…’

अभिषेक झा ने कहा कि समीक्षा की आड़ में कोई ढिलई चाहता है या उसे समाप्त करना चाहता है तो ये नहीं हो सकता है. नीतीश कुमार ने बिहार में इतने वर्षों तक शराबबंदी कानून को मजबूती से लागू रखा है आगे भी रखेंगे. जो लोग बयान दे रहे हैं उनका दिल्ली प्रवास होते रहता है. हमें लगता है कि बिहार में शराबबंदी है लेकिन अन्य प्रदेश में शराबबंदी नहीं है.

शराबबंदी कानून पूरी तरह से फेल: एआईएमआईएम

एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी कानून को पूरी तरह से फेल बताया. अख्तरुल ईमान का कहना है कि बिहार में शराब की होम डिलीवरी हो रही है. सरकार और पुलिस का संरक्षण शराब माफिया को हासिल है. शराबबंदी होने की वजह से नई पीढ़ी सूखे नशे की चपेट में आ गई है.

एक तरफ अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी कानून में ‘छेद’ होने का दावा किया तो वहीं बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून को सदन में सभी दलों की सहमति से लागू किया गया था. बिहार में आशराबबंदी कानून लागू था, लागू है और लागू रहेगा.

आरजेडी ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

इस पूरे विवाद पर आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि शराबबंदी की पोल तो सत्ता धारी दल के विधायक ही सदन में खोल रहे हैं. विधायक कह रहे हैं शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए, तो शराबबंदी से शराब माफिया की चांदी है. जहरीली शराब से लोगों की मौत हो रही है. मुख्यमंत्री जवाब दें. अब तो उन्हीं के घटक दल के नेता शराबंबदी की पोल खोल रहे हैं.

यह भी पढ़ें- उपेंद्र कुशवाहा के MLA ने की शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग, CM नीतीश से कहा, ‘सर अब…’

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!