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पश्चिम बंगाल में SIR की तारीख बढ़ने से CM ममता को क्या फायदा? जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया फैसला

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अंतिम मतदाता सूची की प्रकाशन तिथि बढ़ा दी गई है. पहले यह सूची 14 फरवरी 2026 को जारी होने वाली थी, लेकिन अब इसे 28 फरवरी 2026 तक प्रकाशित किया जाएगा. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने आज जारी किया है.

अधिकारियों को मिल रहीं धमकियां

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया चल रही है, जिसका मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और सही बनाना है. इसमें पुरानी सूची की जांच हो रही है, दावे-आपत्तियां सुनी जा रही हैं और गलत या दोहराए गए नाम हटाए जा रहे हैं. इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां सामने आईं, जैसे अधिकारियों को धमकियां मिलना और दस्तावेज जांच में समय लगना.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया तारीख बढ़ाने का आदेश

ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें SIR पर सवाल उठाए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि दावे, आपत्तियां, नोटिस और दस्तावेजों की जांच या सुनवाई की समय सीमा कम से कम एक हफ्ते बढ़ाई जाए. कोर्ट ने कहा कि 14 फरवरी के बाद भी कम से कम एक सप्ताह और समय दिया जाए ताकि सभी दस्तावेज ठीक से जांचे जा सकें.

इसके बाद चुनाव आयोग ने आज नई समय-सारिणी जारी की. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची अब 21 फरवरी से पहले जारी नहीं होगी. उन्होंने कहा, ‘हमारी पूरी कोशिश है कि इसे 28 फरवरी तक प्रकाशित कर दिया जाए.’

नई समय-सारिणी क्या है?

चुनाव आयोग की अधिसूचना के मुताबिक, दावे और आपत्तियों की सुनवाई अब 14 फरवरी तक चलेगी, पहले यह समयसीमा कम थी. दस्तावेजों की जांच और फैसला 21 फरवरी तक पूरा होगा. वहीं, 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा. यह बढ़ोतरी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए की गई है. इससे पहले SIR की मूल समय-सारिणी में अंतिम सूची 14 फरवरी को आने वाली थी, लेकिन अब 14 दिन (दो हफ्ते) की बढ़ोतरी हुई है.

तारीख आगे बढ़ाने की 4 बड़ी वजहें हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज जांच में ज्यादा समय लगेगा.
  • पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान धमकियां और बाधाएं आईं, जिस पर कोर्ट ने राज्य के DGP से जवाब मांगा.
  • अब 8,505 ग्रुप B अधिकारी SIR में मदद के लिए तैनात किए जा रहे हैं.
  • करीब 1.39 करोड़ मामलों की सुनवाई हो चुकी है और 1.06 करोड़ दस्तावेज अपलोड हो चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या असर होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या हटवाने वाले लोगों को अब ज्यादा समय मिलेगा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह सूची बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव आयोग इसी पर आधारित होगा. TMC ने इसे ‘बड़ी जीत’ बताया है, जबकि विपक्ष इसे देरी बताकर सवाल उठा रहा है.

AZMI DESK

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