स्टारलिंक से पहले जियो-वनवेब ने जमा किए सिक्योरिटी पेपर्स:अभी स्पेक्ट्रम और सुरक्षा क्लीयरेंस पेंडिंग; मस्क ने कहा था- भारतीय उद्योगपति एंट्री रोक रहे
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस देने के लिए जरूरी सिक्योरिटी कंप्लायंस डॉक्यूमेंट्स जमा करने के मामले में स्टारलिंक तीनों कंपनियों में सबसे पीछे रही। एयरटेल समर्थित 'वनवेब' ने सबसे पहले दस्तावेज जमा किए थे, जिसके बाद 'जियो सैटकॉम' ने अपनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों ही कंपनियों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन कॉमर्शियल रोलआउट से पहले अभी रेग्युलेटरी और सिक्योरिटी अप्रूवल पेंडिंग हैं। NDTV की एक रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। मस्क के आरोपों के बाद आई सरकारी रिपोर्ट यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब करीब एक महीने पहले इलॉन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत के "कुछ बड़े उद्योगपति" स्टारलिंक की एंट्री को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। मस्क के बयानों के बाद भारत के सैटकॉम मार्केट और कॉम्पिटिशन को लेकर विवाद छिड़ गया था। प्रक्रिया पूरी तरह ट्रांसपेरेंट, कोई पक्षपात नहीं सरकार ने मस्क के दावों और पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया था। अधिकारियों ने साफ किया कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए लाइसेंसिंग और अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। भारत सरकार हर उस कंपनी का स्वागत करती है जो इस सेक्टर में निवेश और सेवा देना चाहती है। 'कस्टमर इज किंग, यूजर तय करेंगे कौन जीतेगा रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केट में ग्राहक ही सबसे अहम होता है। आखिर में उपभोक्ता ही यह तय करेंगे कि उन्हें कीमत, सर्विस क्वालिटी और वैल्यू के आधार पर किस सैटकॉम प्रोवाइडर की सेवा लेनी है। सर्विस शुरू होने से पहले 2 बड़े फैसले बाकी भले ही जियो, वनवेब और स्टारलिंक तीनों के पास जरूरी लाइसेंस मौजूद हैं, लेकिन देश में आम ग्राहकों तक सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाने से पहले 2 बड़ी रुकावटें हैं: स्टारलिंक बोली- भारत का यूजर डेटा भारत में ही रहेगा 7 अक्टूबर को इंडिया मोबाइल कांग्रेस में स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर ने कहा था कि कंपनी ने भारत के सुरक्षा नियमों के हिसाब से ही अपना ढांचा तैयार किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि भारतीय यूजर्स का डेटा देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखा जाएगा। 3 सवाल-जवाब में स्टारलिंक से जुड़ी जरूरी बातें... सवाल 1: स्टारलिंक क्या है और ये खास क्यों है? जवाब: स्टारलिंक, स्पेसएक्स का प्रोजेक्ट है, जो सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देता है। इसके सैटेलाइट्स पृथ्वी के करीब घूमते हैं, जिससे इंटरनेट तेज और स्मूथ चलता है। ये खासकर उन इलाकों के लिए फायदेमंद है, जैसे गांव या पहाड़, जहां आम इंटरनेट नहीं पहुंचता। सवाल 2: स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में इतना वक्त क्यों लग रहा है? जवाब: स्टारलिंक 2022 से कोशिश कर रही है, लेकिन सिक्योरिटी चिंताओं की वजह से देरी हुई। भारत सरकार ने डेटा सिक्योरिटी और कॉल इंटरसेप्शन जैसी शर्तें रखी हैं। स्टारलिंक ने इन शर्तों को माना। अब सर्विसेज जल्द शुरू हो सकती है। सवाल 3: आम लोगों को क्या फायदा होगा? जवाब: स्टारलिंक से गांवों और दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचेगा, जिससे ऑनलाइन एजुकेशन, टेलीमेडिसिन, और बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सस्ते और बेहतर प्लान्स मिल सकते हैं। --------------------------- बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़े… मस्क बोले- 'डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी':अंदाजा नहीं था आपका इतना प्रभाव, 5 साल से हर शर्त मान रहे; फिर भी अटका इंटरनेट का लाइसेंस
सेटैलाइट इंटरनेट स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर कंपनी के मालिक इलॉन मस्क ने रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर कटाक्ष किया हैं। मस्क ने सोशल मीडिया पर 'डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी' लिखते हुए कहा कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि भारत में उनका इतना प्रभाव है। पूरी खबर पढ़ें…
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