जालंधर के अर्जुन ने पाकिस्तान के खिलाफ शतक ठोका:पिता छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते; अंडर-19 टीम इंडिया को मुश्किल से निकाला
पिता सड़क किनारे छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते थे, घर की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि क्रिकेट का महंगा सपना आसानी से पूरा हो सके। लेकिन बेटे ने हार नहीं मानी। पंजाब के जालंधर के अर्जुन राजपूत ने अब पाकिस्तान के खिलाफ अंडर-19 एशिया कप के मुकाबले में ऐसा शतक लगाया कि हर तरफ उनकी चर्चा होने लगी। अर्जुन ने महज 80 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और 85 गेंदों पर 107 रन की शानदार पारी खेली। यह पारी इसलिए भी खास रही, क्योंकि भारतीय टीम मुश्किल में थी। एक समय 42 रन पर 4 विकेट गिर चुके थे और पाकिस्तानी गेंदबाज हावी थे। ऐसे समय अर्जुन ने मोर्चा संभाला और 11 चौकों व 5 छक्कों की मदद से भारतीय पारी को सहारा दिया। 42 रन पर 4 विकेट गिरने के बाद संभाली पारी
भारत और पाकिस्तान के बीच अंडर-19 एशिया कप का मुकाबला ओमान के अल अमेरात क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया। भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, लेकिन शुरुआत अच्छी नहीं रही। कप्तान लक्ष्य रायचंदानी बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद दूसरे और तीसरे विकेट भी जल्दी गिर गए। पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए अर्जुन ने दबाव में भी धैर्य नहीं खोया। उन्होंने शुरुआत से ही खराब गेंदों को बाउंड्री के पार पहुंचाया। जब भारत का स्कोर 42 रन पर 4 विकेट था, तब भी अर्जुन ने आक्रामक अंदाज जारी रखा। उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा। 80 गेंदों में शतक, 85 गेंद पर बनाए 107 रन
अर्जुन ने पाकिस्तानी गेंदबाजों के खिलाफ बेहतरीन शॉट लगाए। उन्होंने मैदान के चारों ओर रन बटोरे और देखते ही देखते अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इसके बाद भी उन्होंने रफ्तार कम नहीं की। अर्जुन ने 80 गेंदों में शतक पूरा किया। वह 85 गेंदों पर 107 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में 11 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 125.88 रहा। पिता की रेहड़ी से क्रिकेट के मैदान तक पहुंचे
अर्जुन की कामयाबी के पीछे उनके परिवार का संघर्ष छिपा है। वह जालंधर के रहने वाले हैं। उनके पिता होती राम छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में सहयोग किया। अर्जुन ने जालंधर में हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी से क्रिकेट की शुरुआती ट्रेनिंग ली। उनकी प्रतिभा और मेहनत को देखते हुए कोचों ने भी उनका साथ दिया। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अकादमी बंद होने के बाद उनकी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए स्कूल की फीस माफ करवाने में भी मदद की गई। घरेलू क्रिकेट में भी दिखा चुके हैं दम
अर्जुन ने पंजाब की उम्र वर्ग की टीमों में खेलते हुए अपनी पहचान बनाई। उन्होंने पंजाब की अंडर-19 टीम की कप्तानी भी की। वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने इस टूर्नामेंट में 8 मैचों में 695 रन बनाए थे। इसके बाद कूच बिहार ट्रॉफी में प्रदर्शन के दम पर भारतीय अंडर-19 टीम तक पहुंचे। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी माहिर
अर्जुन सिर्फ बल्लेबाजी से ही नहीं, गेंदबाजी से भी टीम के लिए उपयोगी साबित होते हैं। वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। नेपाल के खिलाफ पिछले मुकाबले में उन्होंने 5.3 ओवर में सिर्फ 8 रन देकर 3 विकेट हासिल किए थे। उनका यह प्रदर्शन बताता है कि वह टीम के लिए एक उपयोगी ऑलराउंडर भी हैं। भारत ने पाकिस्तान को दिया 209 रन का लक्ष्य
अर्जुन की शानदार पारी के बावजूद भारतीय टीम पूरे 50 ओवर नहीं खेल सकी। निचले क्रम में काव्य पटेल ने 23 रन का योगदान दिया। भारत की पूरी टीम 46.3 ओवर में 208 रन बनाकर आउट हो गई। इस तरह पाकिस्तान को जीत के लिए 209 रन का लक्ष्य मिला। जालंधर की एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय युवा क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ शतक लगाने तक अर्जुन ने लंबा सफर तय किया है। उनकी यह पारी न सिर्फ भारतीय टीम के लिए अहम रही, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
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