बागै नदी में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत:बांदा में तीसरे किशोर की तलाश जारी; दीपावली मनाने लखनऊ से गांव आया था

Nov 08, 2026 - 20:12
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बागै नदी में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत:बांदा में तीसरे किशोर की तलाश जारी; दीपावली मनाने लखनऊ से गांव आया था
बांदा के कालिंजर थाना क्षेत्र के नौगवां गांव में रविवार दोपहर बागै नदी में नहाने गए तीन लड़के तेज बहाव में डूब गए। इनमें दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि उनके मौसेरे भाई का देर शाम तक पता नहीं चल सका। करीब एक घंटे की तलाश के बाद ग्रामीणों और गोताखोरों ने दोनों भाइयों के शव नदी से बाहर निकाले। तीसरे किशोर की तलाश के लिए 10 गोताखोर लगाए गए हैं। नाव से करीब एक किलोमीटर तक खोजबीन की गई। नदी में जगह-जगह जाल भी डाले गए। एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया ला रहा है। जानिए पूरा मामला… नौगवां गांव निवासी अटल बिहारी के बेटे ऋषभ (20) और अंश (16) रविवार दोपहर करीब एक बजे अपने मौसेरे भाई आयुष (16) पुत्र सुशील त्रिपाठी निवासी गोखिया, अतर्रा के साथ गांव के बाहर बागै नदी के सीमन घाट पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शी चरवाहों के मुताबिक, तीनों करीब दो घंटे तक नदी किनारे मौरंग में खेलते रहे। इस दौरान उन्होंने आपस में कुश्ती भी की। दोपहर करीब तीन बजे तीनों नहाने के लिए नदी में उतर गए। ठीक से तैरना नहीं आने के कारण वे तेज बहाव में बह गए। करीब एक घंटे तक तीनों के बाहर नहीं निकलने पर चरवाहों ने पास के मंदिर के पुजारी को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नदी में तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ऋषभ का शव मिला। करीब 20 मिनट बाद 100 मीटर की दूरी पर अंश का शव भी बरामद कर लिया गया। परिजन दोनों को लेकर नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, आयुष की तलाश जारी है। सुबह ही दीपावली मनाने गांव पहुंचा था ऋषभ ऋषभ लखनऊ में बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। रविवार सुबह करीब आठ बजे ही वह मां के बुलाने पर दीपावली मनाने गांव पहुंचा था। उसका छोटा भाई अंश इंटर का छात्र था, जबकि मौसेरा भाई आयुष भी कक्षा 12 में पढ़ता है। ऋषभ के गांव आने की जानकारी मिलने पर आयुष उससे मिलने पहुंचा था। किसी ने नहीं सोचा था कि त्योहार के दिन हुई यह मुलाकात परिवार के लिए जिंदगीभर का दर्द बन जाएगी। परिजनों ने बताया कि अटल बिहारी पूजा-पाठ और पुरोहित का काम करने के लिए दिल्ली समेत दूसरे प्रदेशों में जाते हैं। इसी कमाई से वह अपने दोनों बेटों की पढ़ाई करा रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि ऋषभ इंजीनियर बनकर परिवार का नाम रोशन करेगा। दोनों बेटों की मौत से मां शीलू और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार बेटों के शवों से लिपटकर बेसुध हो जा रही थीं। एक साथ दो बेटों की मौत से गांव में मातम एक ही परिवार के दो बेटों की मौत की खबर से नौगवां गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाई मिलनसार स्वभाव के थे। दीपावली के दिन हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। गांव के कई घरों में त्योहार के दिन चूल्हे तक नहीं जले। तीसरे किशोर की तलाश में पुलिस और ग्रामीण देर शाम तक जुटे रहे।

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