आबकारी केस में जांच अधिकारी की नौकरी पर लटकी तलवार! कोर्ट के इस आदेश के बाद लग रहीं अटकलें

दिल्ली के शराब घोटाले को खारिज करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने न सिर्फ अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता समेत सभी 23 को बरी किया है, बल्कि कोर्ट ने उन सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ जांच का भी आदेश दिया है, जो इस केस से जुड़े हुए थे. ऐसे में आने वाले वक्त में ये भी हो सकता है कि जिन अधिकारियों की वजह से केजरीवाल और सिसोदिया जैसे नेता जेल गए थे, उन्हीं अधिकारियों को भी जांच में दोषी साबित होने के बाद जेल हो सकती है.
शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करने का फैसला स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह का था. 598 पन्ने के दिए गए अपने लंबे फैसले में जज जीतेंद्र सिंह ने न सिर्फ सीबीआई की सारी दलीलों को खारिज करते हुए सभी 23 को बरी किया बल्कि अदालत ने सीबीआई की ओर से इस केस की जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी जांच का आदेश दिया है.
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जज ने अपने फैसले में क्या कहा?
रॉउज एवन्यू कोर्ट में जज जीतेंद्र सिंह ने अपने फैसले की कॉपी में लिखा है- अगर जांच सही नहीं पाई जाती है तो कोर्ट का दायित्व केवल ऐसी सामग्री को खारिज करना नहीं, बल्कि संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करना भी है. बिना ठोस सबूत के किसी व्यक्ति को आरोपी बनाना जांच तंत्र की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है. जांच में हुई अनियमितताओं को बिना परिणाम के छोड़ देना आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के भरोसे को कमजोर करता है और यह विधि के शासन के सिद्धांत के विपरीत है.
फैसले में राउज एवेन्यू कोर्ट के जज ने कहा है- सीबीआई के जांच अधिकारी ने बिना किसी सबूत के ए-1 यानी कि कुलदीप सिंह को आरोपी बनाने के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया है. जांच अधिकारी ने जान बूझकर अपने पद का दुरुपयोग किया है, जो आपराधिक न्याय प्रणाली की मूल भावना पर प्रहार करता है. इसलिए जांच अधिकारी के खिलाफ उपयुक्त विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए ताकि जवाबदेही तय की जा सके और जांच तंत्र की संस्थागत विश्वसनीयता बनी रहे.
अरविंद केजरीवाल के मामले की जांच कौन कर रहा था?
अदालत के इस फैसले से एक तरफ जहां अरविंद केजरीवाल और उनके सभी साथियों को राहत मिली है, वहीं इस फैसले से न सिर्फ सीबीआई की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं बल्कि अधिकारी के खिलाफ जांच के भी आदेश दिए गए हैं. और अगर जांच में अधिकारी दोषी साबित होते हैं, तो फिर उन्हें भी जेल हो सकती है. रहा सवाल कि सीबीआई के वो कौन से अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ अदालत ने जांच का आदेश दिया तो अदालत ने किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया है.
लेकिन अरविंद केजरीवाल के मामले की जांच के लिए सीबीआई के संयुक्त आयुक्त विप्लव चौधरी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई थी, जिसमें डीएसपी आलोक शाही और एडिशनल एसपी राजीव कुमार समेत दो और भी अधिकारी शामिल थे. अब किसके खिलाफ जांच होगी, कौन दोषी साबित होगा और कौन बरी होगा, तय अदालत करेगी.



