ममता के इस्तीफा न देने से बीजेपी को सरकार बनाने में अड़ंगा? जानें पूरा कानूनी दांव-पेंच

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को एकतरफा बहुमत मिलने के बाद पूरा राज्य भगवामय नजर आ रहा है. चुनाव रिजल्ट जारी हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गए, लेकिन गली-गली में अभी भी बीजेपी के जीत का जश्न मनाया जा रहा है. टीएमसी समेत पूरा विपक्ष बीजेपी की इस जीत में चुनाव आयोग की मिलीभगत का आरोप लगा रहा है.
ममता ने इस्तीफा देने से किया इनकार
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (5 अप्रैल 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश है. उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ‘मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं. जनादेश लूटा गया है. इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है? मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी.’ बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की ‘लूट’ हुई है और उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई.
काउंटिंग सेंटर पर मारपीट का आरोप लगाया
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कल मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर ‘गुंडों’ जैसा व्यवहार कर रहे थे. उन्होंने चुनाव आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा, ‘इतिहास में एक काला अध्याय लिख दिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं.’
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव हारने के बाद किसी पराजित मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो. उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक अभूतपूर्व क्षण साबित हो सकता है.
पद नहीं छोड़ी ममता तो आगे क्या होगा?
संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने बताया कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करते ही ममता बनर्जी को पद छोड़ना होगा. उन्होंने कहा, ‘एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते. ममता बनर्जी निवर्तमान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं और विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है. कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार को भी जाना पड़ता है.’
ममता बनर्जी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सामने मौजूद संवैधानिक या कानूनी विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक अनुशासन के अनुसार उन्हें इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘नयी विधानसभा का चुनाव हो चुका है और जल्द ही भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करेगा और राज्यपाल द्वारा उसे मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाएगा. अगर बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल उन्हें (बनर्जी को) बर्खास्त कर देंगे.’
ममता को इस्तीफा देना होगा: एक्सपर्ट
वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने कहा, ‘राज्यपाल को उन्हें (ममता बनर्जी) बर्खास्त करना चाहिए.’ वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने कहा कि बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा नये मुख्यमंत्री के पदभार संभालने और सदन में बहुमत साबित करने के बाद वह पद हट जाएंगी. उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना होगा और सदन में बहुमत साबित करना होगा… नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के बाद, यह मान लिया जाएगा कि वह पद से हट गई हैं.’
जब 2011 में वाम मोर्चे का 34 साल का शासन समाप्त हुआ तो तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने हार स्वीकार करते हुए तुरंत राजभवन जाकर राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने बिना किसी देरी के पद त्याग दिया, जो एक सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक परिवर्तन का प्रतीक था. उस वर्ष वाम-विरोधी लहर के बल पर सत्ता में आईं ममता बनर्जी ने खुद को एक जमीनी कार्यकर्ता से प्रशासक के रूप में प्रस्तुत किया था.
ममता-कांग्रेस में नजदीकी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी का कांग्रेस से नजदीकी बढ़ाना थोड़ा विरोधाभासी है, क्योंकि उनकी पार्टी पहले कांग्रेस और उसके नेताओं, खासकर राहुल गांधी, की आलोचना करती रही हैं और कई राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में दोनों के बीच अक्सर मतभेद भी रहे हैं. ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन की भी घोषणा की. उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया.
बीजेपी ने उनके दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के फैसले को नकारने का आरोप लगाया. पार्टी प्रवक्ता देबोजित सरकार ने कहा, ‘उनकी टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता. वह सिर्फ खुद को हंसी का पात्र बना रही हैं. हमें लगता है कि वह कुछ और दिनों तक सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बेतुकी टिप्पणियां कर रही हैं.’
ममता के आरोपों को चुनाव आयोग ने नकारा
उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया और कहा कि मतदान के दोनों चरणों के दौरान हिंसा, गोलीबारी या मृत्यु की एक भी घटना नहीं हुई. इस बीच, निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख द्वारा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में ‘अनियमितताओं’ के आरोपों को ‘बेबुनियाद और झूठा’ बताते हुए खारिज कर दिया. इस सीट से चुनाव लड़ रही ममता बनर्जी बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोट के अंतर से हार गईं और इसके बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए.
Input By : पीटीआई भाषा



