स्वास्थ्य

Peacock Deaths Karnataka: कर्नाटक में 44 मोरों की मौत से मचा हड़कंप, क्या इंसानों में भी फैलेगा बर्ड फ्लू?

How H5N1 Bird Flu Spreads To Humans: कर्नाटक के तुमकुरु जिले में मोरों की मौत ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है. खेतों और जंगल के किनारों पर अचानक बड़ी संख्या में मोर मृत पाए गए. 16 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच ऐसे 44 से ज्यादा मामले सामने आए. जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह मामला एच5एन1 बर्ड फ्लू का है, जिसने हाल के वर्षों में कई देशों में चिंता बढ़ाई है. 29 अप्रैल को आईसीएआर-एनआईएचएसएडी की ओर से इसकी पुष्टि के बाद राज्य में निगरानी और नियंत्रण की प्रक्रिया तेज कर दी गई. लेकिन यह सिर्फ वन्यजीवों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा बड़ा सवाल इंसानों की सुरक्षा से भी है. 

सामान्य घटना नहीं माना जाता

मोरों की मौत को केवल एक सामान्य घटना नहीं माना जाता, क्योंकि ऐसे पक्षी अक्सर खतरे का शुरुआती संकेत देते हैं. इस तरह के वायरस पहले पक्षियों में फैलते हैं और अचानक मौतों के जरिए सामने आते हैं। जब ऐसा होता है, तो स्वास्थ्य एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं.

क्या है एवियन इन्फ्लूएंजा?

एवियन इन्फ्लूएंजा एक ऐसा इंफेक्शन है जो जानवरों से इंसानों में फैल सकता है. भारत सरकार के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, इंसानों में इसके मामले आमतौर पर इंफेक्शन पक्षियों या उनके आसपास के वातावरण के संपर्क में आने से होते हैं. यही कारण है कि किसी एक इलाके में भी इसका प्रकोप राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन जाता है.

क्या होते हैं इसके संकेत?

इंसानों में इसके इंफेक्शन के मामले कम होते हैं, लेकिन जब होते हैं तो गंभीर हो सकते हैं. शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं, बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर दर्द. लेकिन कुछ मामलों में यह तेजी से लंग्स को प्रभावित कर सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, निमोनिया और गंभीर श्वसन समस्या हो सकती है.  वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी मानता है कि ज्यादातर मामलों में इंफेक्टेड पक्षियों के साथ सीधे संपर्क के कारण ही यह इंफेक्शन फैलता है. इंसान से इंसान में इसका फैलाव बहुत सीमित है, फिर भी इसकी गंभीरता के कारण सावधानी जरूरी है.

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प्रशासन ने क्या कहा?

तुमकुरु में प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए हैं. इंफेक्शन क्षेत्र को 0 से 3 किलोमीटर और निगरानी क्षेत्र को 3 से 10 किलोमीटर तक चिन्हित किया गया है. इस दायरे में आने वाले 38 गांवों और करीब 20 हजार लोगों पर नजर रखी जा रही है. स्वास्थ्य टीमें लगातार फ्लू जैसे लक्षणों और गंभीर सांस के इंफेक्शन के मामलों की निगरानी कर रही हैं. लोगों के लिए फिलहाल खतरा कम है, लेकिन सावधानी जरूरी है. बीमार या मृत पक्षियों को छूने से बचना चाहिए, हाथों की साफ-सफाई बनाए रखना चाहिए और पोल्ट्री से जुड़े खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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AZMI DESK

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