Azamgarh News: मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा के दोषियों को बरी करना न्याय का मज़ाक़ – शाहनवाज़ आलम*


रिपोर्टर रोशन लाल
आजमगढ़
आजमगढ़, 26 फरवरी 2026. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने मुज़फ़्फ़रनगर सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों के बरी कर दिए जाने को न्याय का मज़ाक़ बताया है. उन्होंने इसके लिए सरकार के प्रभाव में अभियोजन पक्ष द्वारा जानबूझ कर की गई कमज़ोर पैरवी को ज़िम्मेदार ठहराया है.
शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस फ़ैसले पर आश्चर्य नहीं किया जा सकता कि कुटबा गांव के 8 मुसलमानों के सभी 37 हत्यारोपियों को बरी कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 2013 के मुज़फ़्फ़रनगर मुस्लिम विरोधी हिंसा मामलों के फैसलों में एक स्पष्ट पैटर्न देखा जा सकता है जहां पिछले महीने ही मुज़फ़्फ़रनगर की एक और कोर्ट ने मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में रईसुद्दीन नामक व्यक्ति की हत्या के सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था.
उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस जघन्य हत्याकांड के अधिकतर अभियुक्त ज़मानत पर थे जो कमज़ोर आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले मुस्लिम गवाहों को डराने-धमकाने में सक्षम थे.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह पैटर्न बिल्कुल 2002 के गुजरात के राज्य प्रायोजित मुस्लिम विरोधी जनसंहार जैसा है जिसके लगभग सारे आरोपियों को कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया है. उनके बरी किए जाने में पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका को ख़ुद दोषियों ने तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में स्वीकार किया था.
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ख़ुद अपने ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को ख़त्म करवा देंगे और उनकी सरकार अख़लाक़ हत्याकांड के दोषियों पर से मुकदमे हटाने की याचिका डालेगी तो निचली अदालतों से ऐसे फैसलों के आने पर आश्चर्य नहीं किया जा सकता.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा की असलियत तभी सामने आ पाएगी जब अमित शाह की भूमिका की जांच होगी क्योंकि वो हिंसा से ठीक पहले वहाँ गए थे और उनकी कई गुप्त मीटिनिंग्स की खबरे उस समय अख़बारों में छपी थीं. जिसके बाद सुरेश राणा, संगीत सोम और पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह के भड़काऊ भाषणों के बाद हिंसा हुई थी. जिसका मकसद मुस्लिम वोटों पर टिके जाट समुदाय की स्वतंत्र राजनीतिक हैसियत को समाप्त करना था. उन्होंने कहा कि यह उस हिंसा का ही नतीजा है कि आरएलडी के पास आज अपना स्वतंत्र वजूद खो कर भाजपा की गोद में बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.



