आजमगढ़

Azamgarh News: लोकतंत्र सेनानी नागेंद्र राय का निधन, तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

बिलरियागंज (आजमगढ़) देश की लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानी नागेंद्र राय का निधन क्षेत्र के लिए गहरी क्षति बनकर सामने आया है। उनके निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रभक्ति और लोकतंत्र के प्रति समर्पित जीवन जीने वाले नागेंद्र राय को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जहां हर आंख नम और हर दिल भावुक नजर आया।
आजमगढ़ जनपद के सगड़ी तहसील अंतर्गत विकासखंड बिलरियागंज के श्रीनगर (सियरहां) गांव निवासी नागेंद्र राय पुत्र स्व. हनुमान राय ने वर्ष 1975 में देश में लागू आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। उस दौर में तत्कालीन सरकार के विरोध के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लगभग आठ महीने तक आजमगढ़ जेल में निरुद्ध रखा गया। बाद में भीषण बाढ़ के चलते उन्हें गोरखपुर जेल स्थानांतरित किया गया। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को देखते हुए उन्हें लोकतंत्र सेनानी का दर्जा प्रदान किया गया था।
बीते दिनों लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे नागेंद्र राय ने उपचार के दौरान लगभग 70 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर उमड़ पड़े।
राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान नायब तहसीलदार सगड़ी संजय राय की उपस्थिति में आजमगढ़ पुलिस लाइन से पहुंचे पुलिस गार्ड ने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए सलामी दी। “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, नागेंद्र राय तेरा नाम रहेगा” जैसे गगनभेदी नारों के बीच माहौल पूरी तरह देशभक्ति से ओतप्रोत हो उठा।
इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा दोहरीघाट मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई, जहां पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर बिलरियागंज थाने के उपनिरीक्षक एवं पुलिसकर्मी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, शुभचिंतक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नागेंद्र राय अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके तीन पुत्र और दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है, उनकी पत्नी जीवित हैं। परिवार सहित पूरे क्षेत्र के लोगों की आंखें नम रहीं और सभी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले ऐसे सेनानी भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके त्याग, साहस और देशभक्ति की गाथा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्र और लोकतंत्र के लिए किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।
नागेंद्र राय अमर रहें — यही हर श्रद्धांजलि देने वाले की जुबां पर था।

 

AZMI DESK

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