‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’, हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर BJP ने किया तंज

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक बदहाली और कर्ज के मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. बीजेपी प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने एक प्रेस वार्ता में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली की तुलना “नाच न जाने आंगन टेढ़ा” कहावत से की. उन्होंने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन, फिजूलखर्ची और गलत प्राथमिकताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है.
RDG और कर्ज पर सरकार को घेरा
संजय टंडन ने स्पष्ट किया कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का चरणबद्ध तरीके से समाप्त होना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह वित्त आयोग की पहले से तय प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह पता था, फिर भी आय के वैकल्पिक स्रोत बढ़ाने के बजाय सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही.
उन्होंने पड़ोसी राज्य का उदाहरण देते हुए कहा, “हिमाचल और उत्तराखंड दोनों ही पर्वतीय और पर्यटन आधारित राज्य हैं. लेकिन जहां उत्तराखंड ने वित्तीय अनुशासन और निवेश बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत की है, वहीं हिमाचल में कर्ज का अनुपात 40% के खतरनाक स्तर को पार कर गया है. यह स्पष्ट रूप से नीति और नियत का अंतर है.”
‘सलाहकारों की फौज पर लुटा रहे खजाना’
बीजेपी नेता ने सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार आर्थिक संकट का रोना रो रही है, वहीं दूसरी तरफ ओएसडी (OSD), सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों की फौज खड़ी कर दी गई है. इन सलाहकारों को लाखों का वेतन और गाड़ियां दी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि 90:10 के अनुपात वाली केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाने में भी वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल रही है, जबकि पूर्व बीजेपी सरकार ने इनका अधिकतम उपयोग किया था.
केंद्रीय बजट 2026: विकसित भारत की नींव
राज्य सरकार को घेरने के बाद, संजय टंडन ने केंद्रीय बजट 2026 की जमकर सराहना की. उन्होंने इसे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने वाला बजट बताया. उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर हो गई है और हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं. बैंकों का सकल एनपीए (NPA) 11% से घटकर 2% से नीचे आ गया है. वैश्विक डिजिटल भुगतान में भारत की हिस्सेदारी 49% है. इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 12 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
टंडन ने अंत में कहा कि केंद्र सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास कर रही है, जबकि हिमाचल सरकार केवल दोषारोपण की राजनीति कर रही है, जिसका जवाब जनता समय आने पर देगी.



