राज्य

एमपी में बड़ी लापरवाही! CM विरोध में शामिल नाबालिग को हो गई जेल! नहीं दे सका 12वीं का एग्जाम

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है. यहां 17 साल 8 महीने 19 दिन उम्र के छात्र को वयस्क मानकर जेल भेज दिया गया. इसके कारण छात्र 12वीं बोर्ड के अंग्रेजी विषय की परीक्षा नहीं दे सका.

मामले की शुरुआत 8 फरवरी को हुई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहडोल के धनपुरी में वाटर पार्क के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. दोपहर करीब 2 बजे मुख्यमंत्री का काफिला गोपालपुर चौराहे के पास था. इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की.

CM काफिले के पास मची अफरा-तफरी में 3 हुए थे गिरफ्तार

कांग्रेस के इस प्रदर्शन की पूर्व सूचना पुलिस के पास थी. पर्याप्त फोर्स नहीं होने से कुछ देर के लिए सीएम के काफिले के पास अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. स्थिति बिगड़ती देख पीछे से आ रहे शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह गाड़ी से उतर आए. इस दौरान उन्होंने स्वयं मोर्चा संभाला.

पुलिस ने इस मामले में 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. तीनों को तहसीलदार के सामने पेश किया गया. तहसीलदार ने तीनों को जेल भेज दिया.

कागज आने पर पता लगा नाबालिग था सत्यम चतुर्वेदी

जब सत्यम चतुर्वेदी भी जेल पहुंच गया तो उसके परिजनों ने जमानत के लिए आवेदन लगाया और कहा कि उसकी परीक्षा है, उसे जमानत दे दी जाए. जमानत के लिए जब कागजात आए तो पता लगा कि सत्यम 18 साल का नहीं है, अभी वह नाबालिग है. नियम अनुसार नाबालिग को जेल नहीं भेजा जा सकता, लेकिन पुलिस और तहसीलदार की लापरवाही के कारण नाबालिग को जेल की हवा खानी पड़ी और जेल में बंद रहने के कारण वह अपनी परीक्षा भी नहीं दे पाया.

सत्यम को बिना जमानत दिए जेल से छोड़ दिया गया, लेकिन जब तक वह परीक्षा केंद्र पहुंचा तब तक उसकी परीक्षा शुरू हो चुकी थी और वह परीक्षा नहीं दे पाया. इस पूरे मामले पर शहडोल का प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं और कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है. प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक छात्र के भविष्य पर अब सवालिया निशान लग गए हैं.

AZMI DESK

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