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हरियाणा: महिला के शव को ठेले पर ले जाने को मजबूर पीड़ित परिवार, अब मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने फरीदाबाद के बदशाह खान सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु होने वाली 35 वर्षीय महिला के शव को परिवार द्वारा मोटर वाले खुले ठेले पर घर ले जाने के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है. महिला का परिवार शव को ले जाने के लिए वाहन किराए पर नहीं ले पाया, जिससे यह शर्मनाक स्थिति सामने आई.

पीटीआई के अनुसार, आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मरते समय सम्मान और गरिमा के साथ जीवन यापन करने का अधिकार भी शामिल है. किसी मानव की गरिमा उसकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती और राज्य की जिम्मेदारी है कि मृत्यु के बाद शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करें. गरीब होने के कारण परिवार को इस तरह अपमानजनक स्थिति में शव ले जाना पड़ना. यह गरिमा, समानता और मानवीय व्यवहार के अधिकार का उल्लंघन है.

28 जनवरी को हुई थी महिला की मौत

रिपोर्ट के अनुसार, महिला टीबी और संबंधित जटिलताओं से पीड़ित थी और कई सरकारी अस्पतालों में इलाज चलने के दौरान परिवार की सारी आर्थिक संसाधन समाप्त हो गई थी. 28 जनवरी को महिला की मौत हुई. इसके बाद अस्पताल ने शव को ले जाने के लिए 700 रुपये की मांग की, जो परिवार के लिए संभव नहीं था. न तो अस्पताल ने एंबुलेंस उपलब्ध कराई और न ही किसी अन्य साधन का इंतजाम किया. मजबूरी में परिवार को शव को 7-10 किलोमीटर दूर अपने गांव सरुरपुर तक मोटर वाले खुले ठेले पर ले जाना पड़ा.

आयोग ने कहा कि यह केवल परिवार की इच्छा नहीं बल्कि गरीबी और संस्थागत उपेक्षा की वजह से मजबूरी थी. महिला के वृद्ध ससुर ने ठेला चलाया, पति और सास उनके साथ थे. जबकि सात वर्षीय बेटा शव को ढकने वाली चादर पकड़ कर उसकी गरिमा बनाए रखने की कोशिश कर रहा था.

शव को नि:शुल्क घर तक पहुंचाने की बनाई जाए नीति- HHRC

HHRC ने कहा कि गरीब परिवारों को ऐसी परिस्थितियों में छोड़ना सार्वजनिक सेवाओं से वंचित करने के बराबर है और यह राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लंघन है. आयोग ने हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि गरीब परिवारों के अस्पताल में मृत्यु होने पर शव को सम्मानजनक और नि:शुल्क रूप से घर तक पहुंचाने की नीति बनाई जाए.

स्टाफ की लापरवाही पाई गई तो होगी कार्रवाई- डॉ. जयंत आहूजा

आयोग ने 2 अप्रैल को अगली सुनवाई से पहले स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक और फरीदाबाद के सिविल सर्जन से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. बदशाह खान सिविल अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि मामले की जांच आदेशित की गई है और यदि स्टाफ की लापरवाही पाई जाती है तो कार्रवाई होगी.

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AZMI DESK

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