खेती से व्यापार तक… अमेरिका के साथ ट्रेड डील कर भारत को क्या-क्या हुआ फायदा? समझें पूरा गणित

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया है. इससे दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने में नई गति मिली है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिका और भारत इस फ्रेमवर्क को शीघ्र लागू करेंगे.
‘किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित’
भारत के कृषि व डेयरी उत्पादों को लेकर पैदा हुआ खौफ अब पूरी तरह खत्म हो गया है. मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित रखा गया है. उन्होंने बताया कि यह समझौता भारत और अमेरिका को अपने आर्थिक सहयोग को और गहराई देने के साझा संकल्प के साथ आगे बढ़ने में मदद करेगा, जो हमारे नागरिकों और व्यवसायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
कपड़ों और मशीनरी पार्ट्स पर कम हुआ टैरिफ
रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को लेकर भारत फिर से विचार करेगा. खासकर मेवे, फल, सोया तेल, शराब एवं अन्य खाद्य उत्पादों पर या तो टैरिफ हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. अमेरिका भी वस्त्र, परिधान और मशीनरी जैसे भारतीय सामान पर 25 की जगह 18 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा.
किसानों-मछुआरों को मिला 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार
पीयूष गोयल ने बताया कि इस ट्रेड डील से छोटे व्यापारियों के अलावा किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल बाजार के द्वार खुलेंगे. निर्यात में बढ़ोतरी से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे. भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक व रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े भारतीय उत्पादों को अब बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी.
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