कश्मीर में रेल विस्तार पर रोक! सेब के बागों और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर लिया गया फैसला

केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए कश्मीर घाटी में रेलवे लाइनों के विस्तार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय स्थानीय समुदायों के हितों, पर्यावरण सुरक्षा और क्षेत्र की महत्वपूर्ण बागवानी अर्थव्यवस्था को संभावित खतरों को देखते हुए लिया गया है.
केंद्र सरकार ने बारामूला-श्रीनगर कॉरिडोर के साथ अतिरिक्त रेलवे लाइनों के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. इसके अलावा, तीन अन्य प्रमुख परियोजनाएं, जहां शुरुआती सर्वे का काम शुरू हो चुका था, उन्हें भी अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद केंद्र ने यह कदम उठाया.
सहकारी संघवाद और किसानों का सम्मान: अश्विनी वैष्णव
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार के इस रुख को ‘सहकारी संघवाद’ की जीत बताया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय सांसदों की चिंताओं का सम्मान करते हुए परियोजनाओं को रोका गया है. शुरुआती आकलन में पता चला था कि रेलवे विस्तार से कश्मीर के सेब के बागों को भारी नुकसान हो सकता है, जो वहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका पर संकट आए.
कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत: महबूबा मुफ्ती
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पहलगाम और शोपियां जैसे क्षेत्रों में रेलवे लाइनों पर रोक लगाने से लाखों ग्रामीण परिवारों को अनिश्चितता से बचाया जा सकेगा.
मुफ्ती ने जोर देकर कहा, “जो विकास किसानों को विस्थापित करता है, वह प्रगति नहीं है. दुर्लभ उपजाऊ भूमि को नष्ट होने से बचाना कश्मीर के सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिए अनिवार्य था.” उन्होंने मांग की कि भविष्य की किसी भी योजना में किसानों और स्थानीय समुदायों को पारदर्शी तरीके से शामिल किया जाए.
पर्यावरण और स्थानीय संवेदनशीलता सर्वोपरि
सूत्रों का कहना है कि घाटी की भौगोलिक संवेदनशीलता और पर्यावरण जोखिमों को देखते हुए इन परियोजनाओं की अब गहराई से समीक्षा की जाएगी. सरकार का यह फैसला संकेत देता है कि कश्मीर के विकास के लिए अब ‘इको-फ्रेंडली’ और सहयोगात्मक मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी.



