उत्तराखंड सरकार ने खत्म कर दिया मदरसों से जुड़ा ये नियम, नई अधिसूचना जारी, जानें- इसमें क्या?

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है. नए कानून के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्य का मदरसा बोर्ड 31 जुलाई 2026 से समाप्त हो जाएगा. इसके बाद मदरसा बोर्ड से जुड़े सभी कार्य नए गठित प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित किए जाएंगे.
अधिसूचना के अनुसार, कुमाऊं विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इसके अलावा प्राधिकरण में कुल आठ सदस्यों की नियुक्ति की गई है, जो अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कार्य करेंगे.
8 में से 2 सदस्य होंगे मुस्लिम
सदस्य सूची के अनुसार, आठ में से दो सदस्य मुस्लिम समुदाय से हैं. इनमें कुमाऊं विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर सैयद अली हामिद और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर रोबिना अमन शामिल हैं. राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों में मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा माना जाता है.
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों से संबंधित मामले देखेगा प्राधिकरण
नए कानून के तहत गठित यह प्राधिकरण अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों से संबंधित मामलों को देखेगा. इसमें संस्थानों की मान्यता, शैक्षणिक गतिविधियों, पाठ्यक्रम और अन्य प्रशासनिक विषय शामिल होंगे. अभी तक ये सभी कार्य उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत आते थे.
प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवाल
मदरसा बोर्ड के समाप्त होने की घोषणा के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े संगठनों और समुदायों के बीच इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है. कुछ लोग इसे प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों की ओर से प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं.
31 जुलाई 2026 तक समाप्त हो जाएगा बोर्ड
फिलहाल अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित विभागों द्वारा नई व्यवस्था के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. 31 जुलाई 2026 तक मदरसा बोर्ड से जुड़े कार्यों को चरणबद्ध तरीके से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को स्थानांतरित किया जाएगा. इस बदलाव के बाद राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा का संचालन पूरी तरह नए ढांचे के तहत किया जाएगा.



