डिस्टर्ब एरिया बिल: कानून बनाने वाला दूसरा राज्य होगा राजस्थान, मुस्लिम संगठनों ने क्या कहा?

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार आगामी 28 जनवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में ‘डिस्टर्ब एरिया बिल’ (अशांत क्षेत्र विधेयक) पेश करने की तैयारी में है. इस प्रस्तावित कानून को लेकर प्रदेश की सियासत में जबरदस्त कोहराम मचा हुआ है. गुजरात के बाद राजस्थान इस तरह का कानून बनाने वाला देश का दूसरा राज्य होगा, लेकिन बिल के मसौदे (Draft) के सामने आने से पहले ही मुस्लिम समुदायों और सामाजिक संगठनों ने इसके खिलाफ ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान कर दिया है.
सूत्रों के अनुसार, राजस्थान सरकार का यह ड्राफ्ट पूरी तरह से गुजरात के 1991 के कानून पर आधारित है. रोचक तथ्य यह है कि गुजरात में यह कानून उस वक्त लागू हुआ था जब चमन भाई पटेल मुख्यमंत्री थे और उनकी सरकार को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था. हालांकि, 2005 में तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किए थे. अब उसी मॉडल को राजस्थान में लागू करने की तैयारी है, जिसका वर्तमान में कांग्रेस विरोध कर रही है.
मुस्लिम संगठनों में उबाल: ‘बर्दाश्त नहीं करेंगे’
प्रस्तावित बिल को लेकर मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है. प्रोग्रेसिव मुस्लिम फेडरेशन की संस्थापक और इस्लामिक स्कॉलर मैमूना नरगिस ने इस बिल को सीधे तौर पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला बताया है. नरगिस ने कहा कि यह बिल मुसलमानों को खास तौर पर टारगेट करने के लिए लाया जा रहा है. हम हर स्तर पर इस बिल का विरोध करेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा. नरगिस का आरोप है कि इस बिल के बहाने राजस्थान को उत्तर प्रदेश और गुजरात की राह पर ले जाने की तैयारी है, जहाँ इस कानून का दुरुपयोग मुसलमानों को परेशान करने के लिए किया जाएगा.
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
इस कानून के तहत सरकार किसी भी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकती है, जिसके बाद वहां संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के लिए जिला कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य हो जाती है. भाजपा समर्थकों का तर्क है कि इससे पलायन रुकेगा और सामाजिक संतुलन बना रहेगा. वहीं, विरोधियों का कहना है कि यह बिल संवैधानिक अधिकारों का हनन है और इसके जरिए समुदायों को विशेष क्षेत्रों में ही सीमित (Ghettoization) करने की कोशिश की जा रही है.
विधानसभा सत्र में हंगामे के आसार
28 जनवरी से शुरू हो रहे सत्र में सरकार इस बिल को पटल पर रखेगी. मुस्लिम संगठनों के कड़े रुख और कांग्रेस के विरोध को देखते हुए विधानसभा के भीतर और बाहर भारी गहमागहमी रहने के आसार हैं.



