इंडिगो फ्लाइट कैंसलेशन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, यात्रियों को जल्द मुआवजा देने का दिया अहम आदेश

इंडिगो एयरलाइंस द्वारा हाल ही में बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द किए जाने से पैदा हुए भारी अव्यवस्था के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुईं और जो घंटों तक एयरपोर्ट पर फंसे रहे, उन्हें मुआवजा दिया जाना जरूरी है. दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इंडिगो एयरलाइंस को निर्देश दिया कि वह दो हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताए कि फंसे हुए यात्रियों को किस तरह और कितनी राशि का मुआवजा दिया जाएगा.
टिकट का पैसा वापस, मुआवजा प्रक्रिया जारी
दिल्ली हाई कोर्ट को इंडिगो की ओर से बताया गया कि रद्द की गई उड़ानों के सभी टिकटों का रिफंड कर दिया गया है. हालांकि, मुआवजा देने की प्रक्रिया अभी तय की जा रही है और इसे जल्द लागू किया जाएगा. इस पर कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यात्रियों को मुआवजा देने के नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और यह जिम्मेदारी सिर्फ इंडिगो की ही नहीं, बल्कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए की भी है.
लाखों यात्री फंसे, देश की अर्थव्यवस्था पर असर
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले की सुनवाई में कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की वह सराहना करता है, लेकिन एयरपोर्ट पर लाखों यात्रियों का फंसे रहना बेहद चिंताजनक है. इससे न केवल आम जनता परेशान हुई, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ा. यह मामला एक जनहित याचिका के तहत सुना जा रहा है, जिसमें इंडिगो संकट की स्वतंत्र न्यायिक जांच और बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द होने के कारणों की जांच की मांग की गई है.
इंडिगो मामले में केंद्र सरकार का एक्शन सीनियर अधिकारी की छुट्टी, 22 करोड़ का जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने बताया कि इंडिगो के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को सेवा से हटाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा एयरलाइंस पर करीब 22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त चेतावनी भी दी गई है.
मुआवजे के लिए अलग वेबसाइट शुरू की गई – इंडिगो
इंडिगो के वकील ने कोर्ट को बताया कि यात्रियों की शिकायतों और मुआवजे के दावों के लिए एक डेडिकेटेड वेबसाइट लॉन्च की गई है, जहां प्रभावित यात्री आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इंडिगो ने कई यात्रियों को नकद मुआवजे की बजाय 10,000 रुपये का ट्रैवल वाउचर दिया है, जिसकी एक समय-सीमा तय की गई है. इस पर कोर्ट के पूछने पर इंडिगो ने बताया कि यह वाउचर 12 महीने के भीतर इस्तेमाल करना होगा.
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने की मामले में अहम टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने टिप्पणी करते हुए कहा 12 महीने की अवधि ठीक है लेकिन अगर कोई यात्री उस समय के भीतर वाउचर इस्तेमाल नहीं कर पाता तो क्या होगा इस पर निर्देश लेकर जवाब दीजिए. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर इंडिगो से स्पष्ट जवाब दाखिल करने को कहा है.
दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की
इस मामले में कोर्ट ने जांच समिति की रिपोर्ट, जो सीलबंद लिफाफे में दाखिल की गई थी, और डीजीसीए की ओर से पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी के लिए तय की है. इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें इंडिगो द्वारा रद्द की गई उड़ानों के लिए चार गुना मुआवजजा देने और डीजीसीए के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की गई थी.
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