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लखनऊ/प्रदेश विशेष | यूपीपीसीएल मीडिया
उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था इस समय जनआक्रोश के सबसे बड़े दौर से गुजर रही है। स्मार्ट मीटर योजना, जिसे पारदर्शिता और सटीक बिलिंग का प्रतीक बताया गया था, अब आम उपभोक्ता के लिए “शॉक मीटर” बनती जा रही है।
इसी उबाल के बीच इंजीनियर रजत जुनेजा आज मध्यांचल डिस्कॉम में निदेशक (वाणिज्य) का कार्यभार संभालने जा रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की कमान है जो फिलहाल भरोसे के संकट से जूझ रहा है।
📉 जमीनी हकीकत: बिल ज्यादा, जवाब शून्य
प्रदेश के कई जिलों से आ रही तस्वीरें सिस्टम की पोल खोल रही हैं—
- सामान्य खपत में भी 30-40 हजार रुपये तक के बिजली बिल
- रिचार्ज होने के बावजूद कनेक्शन काटने की घटनाएं
- शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई और जवाबदेही का अभाव
बुलंदशहर, अलीगढ़ समेत कई जगहों पर उपभोक्ताओं का गुस्सा पावर हाउस तक पहुंच चुका है।

⚠️ आज से शुरू होगी असली चुनौती
रजत जुनेजा के सामने सिर्फ फाइलों का काम नहीं, बल्कि एक संकटग्रस्त सिस्टम को पटरी पर लाने की चुनौती है—
- स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता बहाल करना
- गलत बिलिंग पर त्वरित सुधार और जवाबदेही तय करना
- प्रीपेड सिस्टम की तकनीकी विफलताओं को खत्म करना
- राजस्व वसूली और उपभोक्ता हितों में संतुलन बनाना
🔍 ‘रिमोट कंट्रोल’ बनाम वास्तविक नेतृत्व
ऊर्जा विभाग में लंबे समय से यह चर्चा है कि डिस्कॉम के अहम निर्णय शीर्ष स्तर से नियंत्रित होते हैं। ऐसे में यह नियुक्ति एक लीडरशिप टेस्ट भी है—
👉 क्या रजत जुनेजा स्वतंत्र और निर्णायक भूमिका निभा पाएंगे?
🏁 अमौसी से मिली साख, अब प्रदेश की बारी
मुख्य अभियंता, अमौसी जैसे संवेदनशील जोन में बिना विवाद कार्य करना रजत जुनेजा की प्रशासनिक क्षमता और साफ छवि को दर्शाता है। अब वही अनुभव पूरे मध्यांचल डिस्कॉम में लागू करना उनकी असली परीक्षा होगी।
📢 उम्मीद भी, दबाव भी
प्रदेशभर में उपभोक्ताओं का गुस्सा और लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन यह साफ संकेत दे रहे हैं कि अब आधे-अधूरे समाधान नहीं चलेंगे।
यूपीपीसीएल मीडिया परिवार की ओर से इंजीनियर रजत जुनेजा को शुभकामनाएं… लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि अब परिणाम ही उनकी पहचान तय करेंगे।
📝 आज से ‘पद’ नहीं, ‘परिणाम’ की शुरुआत
आज का दिन सिर्फ कार्यभार ग्रहण का नहीं—
बल्कि उस भरोसे को वापस लाने की शुरुआत है, जो स्मार्ट मीटर विवाद में कहीं खो गया है।
👉 अगर सुधार हुआ — तो यही बदलाव की कहानी बनेगी
👉 अगर नहीं — तो “स्मार्ट मीटर” विवाद सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाएगा
अब निगाहें एक फैसले पर नहीं, पूरे सिस्टम के बदलाव पर हैं।



