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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में एक ही चर्चा जोरों पर है—जब एक ही विभाग में दो-दो अपर मुख्य सचिव (ACS) बैठेंगे, तो आदेशों की स्पष्टता और कार्यशैली पर असर नहीं पड़ेगा क्या?
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन को ए0सी0एस0 पद पर पदोन्नत किए जाने के बाद भी ऊर्जा विभाग में दो ए0सी0एस0 स्तर के अधिकारी प्रभावी भूमिका में बने हुए हैं। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह स्थिति “नियम विरुद्ध” तो नहीं तो कम से कम “प्रशासनिक भ्रम” अवश्य पैदा कर रही है।
🔎 जूनियर–सीनियर समीकरण बिगड़ने का आरोप
विभागीय सूत्रों का दावा है कि दो शीर्ष स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी से फाइलों के निस्तारण, आदेशों की प्राथमिकता और जवाबदेही तय करने में दिक्कत आ रही है।
* कौन अंतिम निर्णय लेगा?
* किसके निर्देश को प्राथमिकता मिलेगी?
* विभागीय बैठकों में अधिकारों की रेखा कहाँ खिंचेगी?
इन सवालों के बीच “जूनियर-सीनियर” की परंपरागत प्रशासनिक मर्यादा भी प्रभावित होने की चर्चा है।
⚖️ बदलाव की स्थिति या टकराव की भूमिका?
ऊर्जा विभाग में हाल के महीनों में कई बड़े फैसले और आंतरिक फेरबदल चर्चा में रहे हैं। ऐसे समय में शीर्ष स्तर पर अस्पष्टता विभागीय कार्यशैली पर सीधा प्रभाव डाल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्पष्ट आदेश और दायित्व निर्धारण नहीं हुआ, तो इसका असर विद्युत वितरण कंपनियों और फील्ड प्रशासन तक जाएगा।
🏛️ निगाहें अब शासन पर
प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सख्त प्रशासनिक रुख को देखते हुए ऊर्जा विभाग में इस असमंजस की स्थिति पर जल्द स्पष्टता की उम्मीद की जा रही है। सवाल यह है कि क्या शासन स्तर से कोई औपचारिक आदेश जारी होगा या वर्तमान व्यवस्था को ही “व्यावहारिक समाधान” मान लिया जाएगा?
📌 मुख्य सवाल
* क्या ऊर्जा विभाग में दो ए0सी0एस0 की व्यवस्था नियम संगत है?
* क्या यह स्थिति कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है?
* क्या मुख्यमंत्री कार्यालय से जल्द कोई निर्णायक आदेश आएगा?
ऊर्जा विभाग में “बदलाव” की चर्चा तेज है, लेकिन अंतिम निर्णय शासन के पाले में है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक स्पष्टता कब आती है और विभागीय कार्यशैली को नई दिशा मिलती है।
(रिपोर्ट: UPPCL MEDIA, लखनऊ)



