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हरियाणा जाट आरक्षण हिंसा में CBI कोर्ट ने 57 आरोपियों को किया बरी, पढ़ें पूरा मामला

पंचकूला साल 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के बहुचर्चित मामले में पंचकूला स्थित CBI कोर्ट ने आज शुक्रवार (27 फरवरी) को अपना फैसला सुना दिया.

इस मामले में कुल 57 आरोपी अदालत के समक्ष पेश थे. जिनमें अधिकांश रोहतक और झज्जर जिले के निवासी हैं और सभी 57 आरोपियों को बरी कर दिया गया है.

2016 की हिंसा से जुड़ा मामला

जानकारी के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी. आरोप के अनुसार, रोहतक में दिल्ली बाइपास की ओर से आई भीड़ ने पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी को निशाना बनाया.

असामाजिक तत्वों ने पेट्रोल बम फेंककर कोठी में लगाई थी आग

आरोप पत्र के मुताबिक भीड़ लाठी, तलवार और पेट्रोल बम से लैस थी. आरोप है कि भीड़ ने जबरन घर में प्रवेश किया. परिसर में खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया और घर के सामान में लूटपाट की. बताया गया कि घर के अंदर मौजूद लोगों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पेट्रोल बम फेंके गए. जिससे कोठी में आग लग गई और करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ.

60 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जाट आंदोलन के दौरान हुई आगजनी के मामले में CBI कोर्ट के फैसले की पुष्टि बचाव पक्ष के वकील एसपी एस परमार और जितेंद्र हुड्डा ने की है. उन्होंने बताया कि पूर्व कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यू की कोठी जलाने के मामले में CBI ने कुल 60 लोगों को आरोपी बनाया था. इनमें से विजेंद्र, प्रदीप और सुमित की मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी धमेंद्र हुड्डा को भगोड़ा घोषित किया गया है. यह मामला जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की गंभीर तस्वीर पेश करता है.

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AZMI DESK

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