Bhadohi News: अमेरिका के टैरिफ नियमों में उतार-चढ़ाव ने बढ़ाई चिंता, कालीन कारोबारियों ने सरकार से की ये मांग

अमेरिका के टैक्स और टैरिफ नियमों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुये भदोही कालीन कारोबारियों के लिए एक बड़ी चुनौती और अनिश्चितता बनी हुई है. इसे लेकर उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है. कालीन कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ की जंग में कालीन कारोबार पिसता जा रहा है.
कालीन निर्यातक दर्पण बरनवाल ने कहा कि अगस्त 2025 से हैंडमेड कारपेट इंडस्ट्री लगातार बदलते ट्रेड टैरिफ का बोझ झेल रही है. पहले 25% बेस ड्यूटी के साथ 25% अतिरिक्त पेनल्टी जोड़कर कुल 50% तक का असर पड़ा. इसके बाद उम्मीद जगी जब दरें फिर 25% और फिर संभावित रूप से 18% तक आने की बात हुई. लेकिन हाल ही में व्हाइट हाउस द्वारा लगाए गए नए 10% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता बढ़ा दी है. बदलते प्रतिशत सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह हर निर्माता की लागत, ऑर्डर और भविष्य की योजना को सीधे प्रभावित करते हैं.
‘बाजार को अस्थिर कर रहीं टैरिफ नीतियां’
दर्पण बरनवाल ने कहा कि जमीनी सच्चाई यह है कि दो बड़ी वैश्विक ताकतों के बीच चल रही पॉलिसी और शक्ति की इस खींचतान में सबसे ज्यादा दबाव निर्माता और कारीगर पर पड़ रहा है. हमने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए अपनी मार्जिन कम की, कीमतों को संतुलित किया और उत्पादन जारी रखा, ताकि भारत की हैंडमेड पहचान कमजोर न पड़े. लेकिन बार-बार बदलती टैरिफ नीतियां वर्षों की मेहनत से बनाए गए बाजार को अस्थिर कर रही हैं, यही हाल रहा तो आने वाले समय में विश्व विख्यात कालीन नगरी और यह व्यवसाय ख़त्म हो जायेगा.
‘टैरिफ में उतार-चढ़ाव से कालीन का निर्यात फंसा’
वहीं कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC – Carpet Export Promotion Council) के वाइस चेयरमैन और कालीन निर्यातक असलम महबूब ने कहा कि इस समय कीमतों में जो भी टैरिफ घटाया-बढ़ाया गया है उससे हमारा कालीन निर्यात बीच में फंसा हुआ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प और व्हाइट हाउस से मैसेज आता है कि टैरिफ बढ़ा दिया गया है तो कभी सूचना मिलती है कि घटा दिया गया है, इससे कालीन कारोबार इफेक्ट हो रहा है.
असलम महबूब ने कहा कि में कभी 10% बढ़ रहा, कभी घट रहा है, जैसे कल एक न्यूज आई कि ट्रम्प साहब ने 10% एडिशनल ड्यूटी और लगा दी, इस तरह की जो चीज़ें हैं वो शेयर मार्केट जैसा हो गया है. यह बहुत ही इंडस्ट्री के लिए बहुत फायदेमंद नहीं है. एक क्लैरिटी आनी चाहिए कि जो भी लगे 10% लगना, 20% लगना, जो भी लगे, वो क्लियर रहे और हमारा अगला वर्ल्ड है कि VTA जो पंद्रह मार्च को साइन हो रहा है, जल्दी-जल्दी साइन हो जाए. जिससे भारत के कारोबारी भी कन्फर्म हो जाए.



