शिमला: सतलुज नदी में गाद से मंडराया खतरा, DC ने जल्द मांगी रिपोर्ट, नुकसान का होगा आकलन

हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी में लगातार जमा हो रही गाद (Silt) ने एक बड़े खतरे की घंटी बजा दी है. नदी के बहाव क्षेत्र में इस भारी गाद के कारण होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए शिमला जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है. शिमला के उपायुक्त (DC) एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अनुपम कश्यप ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सुन्नी के उपमंडल दण्डाधिकारी (SDM) को निर्देश दिए हैं कि वे सतलुज नदी में गाद जमा होने से उत्पन्न हुए संभावित खतरे की तुरंत पहचान करें और जल्द से जल्द इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को सौंपें. इस रिपोर्ट के प्राप्त होते ही नदी से गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर आरंभ किया जाएगा.
DC के सख्त निर्देश: नुकसान की तैयार की जाए विस्तृत रिपोर्ट
प्रशासन का फोकस केवल गाद निकालना नहीं है, बल्कि इससे हुए नुकसान का सटीक आकलन करना भी है. उपायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि गाद जमा होने के कारण विभिन्न सरकारी विभागों, स्थानीय लोगों के घरों, कृषि योग्य जमीन, पेयजल योजनाओं (पानी की स्कीम), पावर हाउस, संपर्क मार्गों (सड़कों), सीवेज लाइनों और गौशालाओं को जो भी नुकसान पहुंचा है, उसकी पूरी डिटेल रिपोर्ट तैयार की जाए. उपायुक्त कश्यप सतलुज नदी से गाद निकालने के कार्य को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें वन विभाग की रिपोर्ट पर भी गहन मंथन किया गया.
मोहाल अनु से मोहाल लुनसु तक का इलाका संवेदनशील
बैठक के दौरान सुन्नी के एसडीएम राजेश वर्मा ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि तहसील सुन्नी के अंतर्गत मोहाल अनु से लेकर मोहाल लुनसु तक के हिस्से को ‘संवेदनशील क्षेत्र’ के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए. यह क्षेत्र झूले वाले पुल के पास स्थित है और मोहाल लुनसु को करसोग तहसील से जोड़ता है. एसडीएम ने यह भी बताया कि नदी से निकाली जाने वाली गाद के सुरक्षित भंडारण (स्टोरेज) और निष्पादन (डिस्पोजल) के लिए सतलुज नदी के बाएं किनारे पर उचित जमीन की पहचान कर ली गई है.
लोगों के जीवन और घरों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
बैठक के समापन पर उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सतलुज नदी में गाद भरने का यह मामला सुन्नी क्षेत्र के निवासियों के लिए बेहद गंभीर है, जिससे सीधे तौर पर उनके घरों और जीवन पर खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बिना किसी देरी के रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि समय रहते आवश्यक और ठोस कदम उठाए जा सकें.



