‘बिना मंजूरी फीस नहीं वसूल पाएंगे निजी स्कूल’, हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार की बड़ी दलील

राजधानी दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि 1 अप्रैल 2026 से कोई भी निजी स्कूल मनमानी या बिना मंजूरी की फीस नहीं वसूल सकता. दिल्ली सरकार का कहना है कि जब तक फीस नई व्यवस्था के तहत तय और अधिकृत नहीं हो जाती तब तक स्कूलों को पुरानी या स्वयं तय की गई फीस लेने का अधिकार नहीं होगा.
निजी स्कूलों ने 1 फरवरी के आदेश को दी है चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट में निजी स्कूल संगठनों ने सरकार के 1 फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी बनाने को अनिवार्य किया गया है. दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट द्वारा फीस कानून पर उठाए गए सवालों के बाद जारी की थी. ताकि नई व्यवस्था को स्मूथ तरीके से लागू किया जा सके. सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि अगर कानून को 1 अप्रैल से लागू नहीं किया गया तो उसका मकसद ही खत्म हो जाएगा.
‘मुनाफाखोरी और मनमानी फीस पर रोक के लिए कानून’
नया कानून दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट स्कूलों में मुनाफाखोरी और मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है. सरकार का तर्क है कि बिना नियमन के फीस वसूलने की छूट देना, अभिभावकों के साथ अन्याय होगा. दूसरी ओर स्कूल संगठनों का कहना है कि सरकार ने कानून में तय समयसीमा बदल दी है. उनके अनुसार फीस निर्धारण की प्रक्रिया पिछले शैक्षणिक वर्ष के जुलाई से शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन अब अचानक जल्दबाजी में कमेटियां बनाने और 14 दिन के भीतर प्रस्ताव देने को कहा जा रहा है. जो व्यावहारिक नहीं है. उनका यह भी कहना है कि कमेटी में सर्वसम्मति से फैसला लेना आसान नहीं होता.
दिल्ली हाई कोर्ट 24 फरवरी को करेगा मामले में सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है. लेकिन 24 फरवरी को अगली सुनवाई तय की है. तब तक कमेटी गठन की समयसीमा बढ़ा दी गई है. अब अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन और छात्रों की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं.



