देहरादून: स्मार्ट सिटी पर सियासत तेज, शहर की सड़कों पर सवाल, BJP विधायक भी असंतुष्ट

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्मार्ट सिटी को लेकर सियसत तेज हो गई है. स्मार्ट सिटी का सपना देखते-देखते देहरादून की सड़कें आज भी खुदी पड़ी हैं. योजनाएं फाइलों में दबी हैं और आम आदमी धूल-मिट्टी में सफर करने को मजबूर है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जमीन पर तस्वीर बदलने का नाम नहीं ले रही. हालत यह है कि खुद सत्तारूढ़ बीजेपी के विधायक इस काम से संतुष्ट नहीं हैं और खुलकर नाराजगी जता रहे हैं. बीजेपी विधायक खजान दास ने पत्रकारों से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जिस रफ्तार और जिस तरीके से काम होना चाहिए था, वह अब तक नहीं हो पाया और इससे वे खुद संतुष्ट नहीं हैं. यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यह विरोधी खेमे से नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के अपने नुमाइंदे की जुबान से निकला है.
विधायक ने सरकार का किया बचाव
हालांकि विधायक खजान दास ने सरकार का बचाव करते हुए यह भी कहा कि विकास कार्य लगातार जारी हैं और नई जरूरतों के हिसाब से योजनाओं में बदलाव होते रहते हैं. उनका यह भी मानना है कि किसी भी विकास कार्य को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है और इसी की कमी कहीं न कहीं इन कामों में रोड़ा बन रही है.
विधायक ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी के काम जिस कार्यदाई संस्था को सौंपे गए थे, उसने जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई और लापरवाही के चलते काम तय समय पर पूरे नहीं हो सके. इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दखल देते हुए प्रदेश की अपनी कार्यदाई संस्था को यह काम सौंपा है. विधायक का दावा है कि अब बचे हुए काम जल्द पूरे होंगे.
कांग्रेस ने लगाया घोटाले का आरोप
वहीं कांग्रेस इस सफाई से संतुष्ट नहीं है. कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह ने तीखे तेवरों के साथ कहा कि जब स्मार्ट सिटी के लिए बजट आया था तभी से अधिकारियों और नेताओं में बंदरबांट शुरू हो गई थी.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उसी वक्त आगाह किया था कि इस लूट को रोको और पैसा जमीन पर दिखाओ. आज अगर बीजेपी के अपने विधायक सवाल उठा रहे हैं तो यह कांग्रेस के उन्हीं आरोपों की पुष्टि करता है.
स्मार्ट सिटी में करोड़ों का घोटाला हो चुका है- राजेंद्र शाह
राजेंद्र शाह ने आगे कहा कि स्मार्ट सिटी में करोड़ों का घोटाला हो चुका है. शहर की सड़कें खोदी गईं, काम अधूरा छोड़ा गया और जो खाइयां बंद की गईं उनमें ठीक से मिट्टी तक नहीं भरी गई. उन्होंने चेतावनी दी कि जब बरसात आएगी तो ये सड़कें धंसेंगी, गाड़ियां फंसेंगी और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.
शाह ने कहा कि यह सब महज कागजों में बजट दिखाने और खानापूर्ति करने का नतीजा है जिसकी कीमत देहरादून की जनता को चुकानी पड़ेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी.
स्मार्ट सिटी पर सियासत तेज
फिलहाल स्मार्ट सिटी का मामला राजनीतिक रंग पकड़ चुका है. एक तरफ सत्ता पक्ष के विधायक खुद काम की धीमी गति पर असंतोष जता रहे हैं तो दूसरी तरफ विपक्ष घोटाले के आरोप लगा रहा है. देखना यह होगा कि नई कार्यदाई संस्था के भरोसे यह शहर आखिरकार स्मार्ट सिटी का सपना कब पूरा कर पाता है.



