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⚡ 400 KVA ट्रांसफार्मर उठा ले गए चोर — गोमती नगर की बिजली नहीं, विभाग की व्यवस्था नंगी हुई
लखनऊ। मध्यांचल डिस्कॉम अधीनस्थ गोमती नगर जोन के शिवपुरी पावर हाउस क्षेत्र स्थित राय एनक्लेव कॉलोनी में बीती रात ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई जिसने बिजली व्यवस्था की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी। अज्ञात चोरों ने कॉलोनी गेट का ताला तोड़कर कॉलोनी कार्यालय के बगल में स्थापित 400 केवीए ट्रांसफार्मर को खोलकर उसकी मशीनरी उखाड़ ले गए।

घटना को जिस तकनीकी बारीकी और कम समय में अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि यह किसी सामान्य चोर का काम नहीं हो सकता। ट्रांसफार्मर खोलने की प्रक्रिया, कौन-कौन से पार्ट्स निकालने हैं, किसे छोड़ना है — यह सब वही व्यक्ति जान सकता है जिसे विद्युत प्रणाली का व्यावहारिक अनुभव हो। सूत्रों की मानें तो यह काम पूरी योजना के साथ किया गया।

बताया जा रहा है कि एक दिन पूर्व अपाचे बाइक से मौके की रेकी की गई थी, लेकिन करंट का झटका लगने के कारण प्रयास असफल रहा। इसके बाद अगली रात पूरी तैयारी के साथ चोरी को अंजाम दिया गया।
अज्ञात लोग गेट का ताला तोड़कर कॉलोनी कार्यालय के बगल में लगा 400 केवीए ट्रांसफार्मर खोलकर उसकी पूरी मशीनरी निकाल ले गए — और किसी को भनक तक नहीं लगी।

यह काम किसी कबाड़ी चोर का नहीं था। जिस सटीकता से ट्रांसफार्मर खोला गया, जिन पार्ट्स को चुना गया, जिनको छोड़ा गया — साफ है कि यह हाथ उन लोगों का है जिन्हें सिस्टम की नस-नस पता है।
एक दिन पहले अपाचे बाइक से ट्रायल भी हुआ, करंट लगा तो वापस गए… अगली रात पूरी तैयारी से लौटे और काम पूरा करके निकल गए। मतलब — चोर नहीं, सिस्टम के पुराने खिलाड़ी थे।
संक्षेप में कहे तो, शिवपुरी पावर हाउस क्षेत्र की राय एनक्लेव कॉलोनी में बीती रात जो हुआ, वह सिर्फ चोरी नहीं बल्कि बिजली विभाग की सुरक्षा, प्रबंधन और नीतियों पर सीधा तमाचा है।

❗ विभागीय नीतियां बनीं अपराध की पृष्ठभूमि?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में हटाए जाने का निर्णय — जबकि शासनादेश 60 वर्ष का है — हजारों अनुभवी कर्मचारियों को एक झटके में बेरोजगार कर रहा है। वर्षों तक लाइन, ट्रांसफार्मर और फाल्ट पर काम करने वाले कर्मी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। परिवार, पढ़ाई, लोन और जीवनयापन संकट में पड़ गया । वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर संविदा कर्मियों की संख्या में कटौती की जा रही है। ऐसे में विभाग यह नहीं बता पा रहा कि इन लोगों के लिए आगे का रास्ता क्या है? जिस आदमी को आपने ट्रांसफार्मर का डॉक्टर बनाया, उसे एक दिन बेरोजगार कर दिया… तो वह मजदूर बनेगा या वही करेगा जो उसे आता है? जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी — लेकिन सवाल नीति पर है।
(यह टिप्पणी सामाजिक परिस्थिति पर आधारित है, घटना की पुलिस जांच अलग से जारी है)
⚡ फील्ड इंजीनियरों की मेहनत काबिले-तारीफ
जहां एक तरफ सुरक्षा व्यवस्था फेल साबित हुई, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियरों और लाइन स्टाफ की कार्यशैली की चर्चा भी जरूरी है। लगातार फाल्ट, ओवरलोड और चोरी के बीच आपूर्ति बनाए रखना, सीमित स्टाफ में 24 घंटे ड्यूटी करवाना, संसाधन कम होते हुए भी, जिम्मेदारी ज्यादा रहना…ग्राउंड पर इंजीनियर और लाइन स्टाफ आधे संसाधन में 24 घंटे बिजली चला रहे हैं, फाल्ट भी वही ठीक कर रहे, जनता का गुस्सा भी वही झेल रहे, चोरी का नुकसान भी वही भर रहे. यह जानते हुए भी गलती उनकी नहीं, गलती उन कुर्सियों की है जिन्हें फील्ड की हकीकत नहीं पता ….इन हालातों में भी बिजली आपूर्ति चलती रहना बताता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियर और कर्मचारी ही व्यवस्था की असली रीढ़ हैं। चोरी की यह घटना उनकी मेहनत पर नहीं, बल्कि प्रबंधन की सुरक्षा और मानव संसाधन नीति पर सवाल खड़े करती है।

📉 एक महीने में दूसरी बड़ी घटना
सिर्फ एक माह पहले ही 250 KVA ट्रांसफार्मर गायब होने की घटना सामने आई थी, जिसकी जांच अभी जारी है। पहले 250 KVA ट्रांसफार्मर गायब, अब 400 KVA उखड़ गया. अब भी विभाग कहेगा … “जांच जारी है” लगातार हो रही घटनाएं बताती हैं कि मामला अलग-अलग चोरी नहीं बल्कि एक पैटर्न बनता जा रहा है।
🗣 यूपीपीसीएल मीडिया की मांग
यह घटना केवल चोरी नहीं… व्यवस्था को आईना है।🗣 यूपीपीसीएल मीडिया की सीधी बात- या तो 👉 सुरक्षा मजबूत करो, या फिर👉 अनुभवी संविदा कर्मियों को वापस लो. वरना अगली बार ट्रांसफार्मर नहीं… पूरी लाइन गायब मिलेगी।
यह चोरी नहीं… व्यवस्था की बनाई हुई घटना है।
अभी भी समय है — यदि विभाग ने अपनी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया तो ऐसी घटनाएं सिर्फ उपकरण ही नहीं, विभाग की साख भी उखाड़ती रहेंगी।



