बस्ती जल विभाग घोटाले पर अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा?

बस्ती जनपद के सदर ब्लॉक के हरदिया गांव में पानी की टंकी के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट के मामले में अब जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद कैमरे के सामने आए है. उन्होंने इस घोटाले पर अपनी सफाई दी है. कल तक जो हाथ बांधकर कहते नजर आ रहे थे कि आज नहीं बोलूंगा, दिन ठीक नहीं है, एबीपी न्यूज़ ने जब इस खबर को प्रमुखता दिखाया तो अधिकारी चुप्पी टूटी है.
जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि, जो दूसरा बोर्ड लगा है, वो पानी की टंकी की मरम्मत का है. वर्ष 2020 में पानी की टंकी में खराबी आई जिस वजह से 32 लाख रुपये उसे सही कराने में खर्च हुआ है. एबीपी न्यूज़ ने उनसे सवाल किया कि 10 साल पहले टंकी बनी, फिर लाखों रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई, बावजूद जल निगम के अधिकारियों ने क्यों ढाई करोड़ के पानी की टंकी को गिरा दिया?
क्यों गिराई गई पानी की टंकी?
एबीपी न्यूज़ के इस सवाल का जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद जवाब न दे सके. योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि, गुणवत्ताहीन कार्य होने की वजह से पानी की टंकी लीक होने लगी थी, इसीलिए सुरक्षा के दृष्टि से उसे गिरवा दिया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि शासन राशि स्वीकृत होते ही नई पानी टंकी का निर्माण किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल बस्ती के सदर ब्लॉक में स्थित हरदिया गांव में साल 2015-16, निर्मल योजना के तहत सवा दो करोड़ रुपये की लागत से टंकी का निर्माण कराया था. इसके बाद साल 2019-20 में इसी स्थान पर फिर से लाखों रुपये खर्च कर दूसरी टंकी बनाई गई लेकिन सिर्फ कागजों में. गांव वालों का कहना है कि अधिकारी आते हैं, बोर्ड टांगते हैं और चले जाते हैं. बाल्टी लेकर घंटों खड़े रहो, तब जाकर एक घूंट पानी नसीब होता है.



