आजमगढ़

Azamgarh News: विधान परिषद में गूंजा बिजली संकट, बुनकरों की बदहाली और स्मार्ट मीटर का मुद्दा

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

सपा एमएलसी शाह आलम ‘गुड्डू जमाली’ ने ऊर्जा विभाग पर साधा निशाना, कहा “विभाग की स्थिति बेहद दयनीय”

आजमगढ़/लखनऊ, 17 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बजट सत्र में बिजली संकट, स्मार्ट मीटर की शिकायतें, किसानों की समस्याएं और बुनकरों की बदहाली का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। समाजवादी पार्टी के एमएलसी शाह आलम ‘गुड्डू जमाली’ ने नियम105 के तहत ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने विभाग में व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए इसे जनहित से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताया।
सदन में बोलते हुए जमाली ने कहा कि बिजली प्रदेश की “लाइफलाइन” है, लेकिन वर्तमान में विभाग की स्थिति बेहद खराब है। अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग से आम जनता परेशान है। किसानों को सिंचाई के समय बिजली नहीं मिलती और रात में आपूर्ति होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। मजबूरी में किसानों को महंगे डीजल से सिंचाई करनी पड़ रही है।
उन्होंने स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हाई-लेवल टेक्निकल ऑडिट कराने की मांग की। उनके अनुसार प्रदेश में लगभग 10 हजार शिकायतें लंबित हैं और आधे से अधिक उपभोक्ता बिलिंग व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। उन्होंने इसे गंभीर जनसमस्या बताते हुए पारदर्शी जांच की आवश्यकता बताई।
सपा एमएलसी ने बुनकर समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा वर्ष 2006 में बुनकरों को 74 रुपये फ्लैट रेट की सुविधा दी गई थी, जो मार्च 2023 तक जारी रही। लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा इसे बढ़ाकर 430 रुपये कर देने से गरीब बुनकरों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ गया है।
जमाली ने भ्रष्टाचार का उदाहरण देते हुए आजमगढ़ जनपद के हरैया ब्लॉक स्थित रौनापार उपकेंद्र के अंतर्गत ग्राम देवारा खास राजा शिवलोचन का पूरा का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में बिना खंभा और तार लगाए ही 12 घरों में मीटर लगा दिए गए, जबकि आज तक वहां बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को लगातार बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा विभाग में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मात्र 9,600 रुपये वेतन दिए जाने को नाकाफी बताते हुए कहा कि इतनी कम आय कर्मचारियों को आर्थिक संकट में डालती है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ती है।
एमएलसी ने मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की समस्या उठाते हुए कहा कि पहले इस श्रेणी को घरेलू नलकूप माना जाता था, लेकिन अब अधिकारियों द्वारा इसे कमर्शियल श्रेणी में डालने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे बिजली दर 2 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 8.40 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है। साथ ही घरेलू कनेक्शन और नलकूप की लागत भी तीन से चार गुना बढ़ गई है। अपने संबोधन के अंत में शाह आलम ‘गुड्डू जमाली’ ने सभापति के माध्यम से मांग की कि यह लोक महत्व का गंभीर विषय है, जिस पर सदन की कार्यवाही रोककर विस्तृत चर्चा कराई जाए तथा सरकार तत्काल समाधान सुनिश्चित करे।

AZMI DESK

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