MCD का बड़ा फैसला, अब CNG और इलेक्ट्रिक दाह संस्कार पूरी तरह मुफ्त, 2 साल तक नहीं लगेगी फीस

दिल्ली में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. नगर निगम ने तय किया है कि उसके अधीन आने वाले श्मशान घाटों पर CNG और इलेक्ट्रिक माध्यम से होने वाले दाह संस्कार पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.
यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर दो साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जा रही है. प्रस्ताव को हाउस मीटिंग में पेश किया गया और ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई.
39 श्मशान घाटों का जिम्मा MCD के पास
नगर निगम राजधानी में कुल 39 श्मशान घाट, कब्रिस्तान और ईसाई कब्रिस्तानों का संचालन करता है. इनमें से अधिकतर स्थानों का प्रबंधन सामाजिक संस्थाओं, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और ट्रस्टों के माध्यम से किया जाता है. ये संस्थाएं ‘नो लॉस, नो प्रॉफिट’ मॉडल पर काम करती हैं, यानी इनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि सेवा देना है.
प्रदूषण कम करने की दिशा में पहल
नगर निगम का मानना है कि पारंपरिक लकड़ी से दाह संस्कार के दौरान निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है. अधिकारियों के स्तर पर हुई बैठकों में यह राय बनी कि CNG और इलेक्ट्रिक विकल्पों को बढ़ावा देकर प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है. इसी सोच के तहत लोगों को आर्थिक राहत देकर इन माध्यमों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई गई.
खर्च में भी बड़ा अंतर
जानकारी के मुताबिक लकड़ी से दाह संस्कार कराने पर औसतन करीब 6000 रुपये तक का खर्च आता है. वहीं CNG आधारित दाह संस्कार में यह खर्च लगभग 1500 रुपये के आसपास रहता है. अब जब इस पर से शुल्क पूरी तरह हटाया जा रहा है, तो आम लोगों के लिए यह विकल्प और भी सुलभ हो जाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट से बदलेगी अंतिम संस्कार की व्यवस्था
पिछले तीन वर्षों में राजधानी में कुल दाह संस्कारों में से केवल 8 से 9 प्रतिशत ही CNG या इलेक्ट्रिक माध्यम से हुए हैं. ऐसे में मुफ्त सुविधा लागू होने के बाद यदि यह आंकड़ा 25 प्रतिशत तक भी पहुंचता है, तो नगर निगम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये का अतिरिक्त भार पड़ सकता है. अनुमान है कि सालाना यह खर्च दो करोड़ रुपये तक जा सकता है.
ऐसे में नगर निगम को प्रदूषण घटाने और आधुनिक विकल्पों को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ बढ़ते खर्च का प्रबंधन करने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.



