वर्दी में पुलिस या सरकार के रक्षक? जनगांव में बीआरएस पार्षद का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुलिस की ‘किडनैपिंग थ्योरी’ फेल

तेलंगाना में आज (16 फरवरी) नगर निकाय अध्यक्षों के चुनाव के दौरान लोकतंत्र की मर्यादा और सत्ता की खींचतान के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार सुबह करीब 10:15 बजे जनगांव नगर पालिका कार्यालय के बाहर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब नवनिर्वाचित बीआरएस (BRS) पार्षद हफीज फातिमा को पुलिस ने भीतर जाने से रोक दिया.
पुलिस का तर्क था कि उन्हें फातिमा के ‘किडनैप’ होने की शिकायत मिली है, जबकि पार्षद खुद चिल्लाकर कह रही थीं कि वे सुरक्षित हैं और अपनी मर्जी से वोट डालने आई हैं. जनगांव के चुनावी अखाड़े में उस समय ड्रामा चरम पर पहुंच गया जब पुलिस कर्मियों ने हफीज फातिमा को जबरन अपनी हिरासत में लेने की कोशिश की.
पुलिस का क्या है दावा
पुलिस का दावा था कि उनके पास शिकायत है कि पार्षद का अपहरण हुआ है और वे उन्हें ‘बचाने’ आए हैं लेकिन हफीज फातिमा ने निडर होकर पुलिस को खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा, “मैं बीआरएस पार्टी के साथ हूं, मुझे किसी ने किडनैप नहीं किया है. मैं यहां अपनी पार्टी के लिए वोट करने आई हूं, मुझे रोका क्यों जा रहा है?” इसके बाद वे पुलिस के घेरे को तोड़ते हुए कार्यालय के भीतर दाखिल हुईं.
पुलिस पर कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह काम करने का आरोप
बीआरएस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ‘खाकी वर्दी’ में कांग्रेस के ‘कार्यकर्ता’ की तरह काम कर रही है. सिर्फ जनगांव ही नहीं, थोरूर नगर पालिका चुनाव को लेकर भी भारी हिंसा देखने को मिली. सुबह 9:00 बजे के करीब जनगांव जिले के पेंबर्ती बाईपास पर कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी और उनके समर्थकों ने बीआरएस पार्षदों की बस को रोक लिया. पूर्व मंत्री एर्राबल्ली राव और उनके समर्थकों ने जब इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों में जमकर हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई.
ड्रामे के पीछे की असल वजह ‘नंबर गेम’
विवाद इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों तक यातायात बाधित रहा. अंत में भारी पुलिस बल के हस्तक्षेप के बाद बस को थोरूर रवाना किया गया. इस पूरे ड्रामे के पीछे की असल वजह ‘नंबर गेम’ है. हालिया चुनाव परिणामों में जनगांव नगर पालिका में त्रिशंकु परिणाम (BRS 13, कांग्रेस 12, निर्दलीय 5) आए हैं. यहां अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए एक-एक वोट की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है. यही कारण है कि ‘कैंप पॉलिटिक्स’ और विपक्षी पार्षदों को रोकने के लिए अपहरण जैसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.
ये भी पढ़ें
AI Summit 2026: दुनिया देखेगी भारत की पावर! फ्रांस से ब्राजील तक AI Impact Summit 2026 में ग्लोबल पावर का लगेगा जमावड़ा



