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मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत सुल्तानपुर जनपद के लम्भुआ क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ घरेलू 1 किलोवाट के साधारण विद्युत कनेक्शन को लेकर विभागीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
📌 मामला क्या है?
आवेदक – आशुतोष मनी मिश्रा
निवासी – बेलाही, लम्भुआ, सुल्तानपुर
आवेदन संख्या – J3716539201
आवेदन तिथि – 04/01/2026
निस्तारण – आवेदन निरस्त
कारण बताया गया: एसडीएम द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र को स्थानीय प्रधान द्वारा सत्यापित न किया जाना।

यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब निवास प्रमाण पत्र एक सक्षम राजस्व अधिकारी (एसडीएम) द्वारा जारी किया गया है, तो क्या उसकी वैधता किसी स्थानीय प्रधान की पुष्टि पर निर्भर है? क्या अब विभागीय प्रक्रिया में एसडीएम से ऊपर प्रधान को मान्यता दी जा रही है?
❗ तीन-तीन बार आवेदन, हर बार रिजेक्ट
सूत्रों के अनुसार, आवेदक ने एक नहीं बल्कि तीन बार कनेक्शन के लिए आवेदन किया, लेकिन हर बार आवेदन को निरस्त कर दिया गया।
और कारण?
स्थानीय स्तर पर प्रधान और संबंधित अवर अभियंता की कथित मित्रता।
यह आरोप भी सामने आया है कि आवेदक के परिवार पर सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है कि वे वर्तमान प्रधान के समक्ष “झुकें”, अन्यथा कनेक्शन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यदि यह सत्य है तो यह केवल एक आवेदक का उत्पीड़न नहीं, बल्कि विभागीय गरिमा पर सीधा प्रहार है।
🏛 आवेदक की पृष्ठभूमि
पिता – 45 वर्ष तक प्रधान रहे
भाई – बरेली में जीएसटी विभाग में कमिश्नर स्तर के अधिकारी
स्वयं आवेदक – एक सरकारी अध्यापक
प्रश्न यह नहीं कि आवेदक का परिवार क्या है।
प्रश्न यह है कि क्या एक आम नागरिक को भी विद्युत कनेक्शन के लिए “सामाजिक निष्ठा” सिद्ध करनी होगी?
📞 विभाग का पक्ष
जब इस संबंध में अवर अभियंता लम्भुआ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो कॉल रिसीव नहीं की गई।
वहीं, वाणिज्य निदेशक श्री योगेश कुमार ने स्पष्ट कहा कि आवेदन का विवरण उपलब्ध कराएँ, यदि कागजात पूर्ण हैं तो कारण की जाँच की जाएगी।
UPPCL Media में शिकायत आने के बाद, 4 फरवरी 2026 को पुनः आवेदन कराया गया है:
नया आवेदन संख्या – MV/J26/B00253500
⚡ बड़ा सवाल
क्या अवर अभियंता को यह अधिकार है कि वह एसडीएम द्वारा जारी दस्तावेज़ को “प्रधान की सहमति” के आधार पर खारिज कर दे?
यदि ऐसा है तो यह न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि यह दर्शाता है कि क्षेत्र में प्रशासनिक निर्णय “मित्रता” के आधार पर लिए जा रहे हैं।
क्या ऐसे अवर अभियंता विभाग के हितकारी हैं?
या फिर उनकी कार्यप्रणाली से पूरा डिस्कॉम बदनामी झेल रहा है?
🧾 विभागीय नियम क्या कहते हैं?
घरेलू संयोजन के लिए निर्धारित दस्तावेजों में सक्षम अधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र मान्य होता है। यदि कोई दस्तावेज अपूर्ण है तो स्पष्ट आपत्ति दर्ज कर संशोधन का अवसर दिया जाता है। सीधा रिजेक्शन—वह भी बार-बार—कई सवाल खड़े करता है।

🔎 अब आगे क्या?
UPPCL Media इस प्रकरण की निगरानी करेगा।
यदि दस्तावेज पूर्ण पाए जाते हैं और फिर भी कनेक्शन नहीं दिया जाता, तो यह मामला उच्च स्तर तक उठाया जाएगा।
बिजली कनेक्शन कोई एहसान नहीं, उपभोक्ता का अधिकार है।
और यदि नियमों से ज्यादा “दोस्ती” भारी पड़ रही है, तो यह व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।
✍️ UPPCL Media – सच के साथ
UPPCL Media इस प्रकरण की हर परत उजागर करेगा।
नियम से ऊपर कोई नहीं — न प्रधान, न अभियंता।
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