राजस्थान: राइट टू हेल्थ स्कीम पर संकट! 8 करोड़ लोगों की सेहत को लेकर सरकार और विपक्ष में तकरार

राजस्थान में राइट टू हेल्थ एक्ट को लेकर सरकार और विपक्ष में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने- सामने हैं. कांग्रेस जहां राजस्थान की सरकार पर राज्य के लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी ने बेतुकी दलील पेश करते हुए कहा है कि जिस योजना का क्रेडिट हमें ना मिले, उसे लागू करने का क्या फायदा. बहरहाल सियासी घमासान के बीच अब राज्य में राइट टू हेल्थ की योजना खतरे में पड़ती हुई नजर आ रही है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान के 8 करोड़ लोगों की सेहत और इलाज खतरे में पड़ सकता है.
राजस्थान में यह विवाद दो दिन पहले उस वक्त शुरू हुआ था, जब विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सदन में राज्य के हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस योजना की जरूरत को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए. मंत्री ने विधानसभा के सदन में कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि यह योजना गैर जरूरी थी. तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार बिना किसी तैयारी के जल्दबाजी में इसे सियासी फायदे के मद्देनजर लेकर आई थी. विधानसभा के सदन में हेल्थ मिनिस्टर के इस बयान से यह माना जा रहा है कि सरकार की दिलचस्पी राइट टू हेल्थ योजना को लेकर कतई नहीं है और वह जल्द ही इसे खत्म करने का ऐलान कर सकती है.
गहलोत सरकार लेकर आई थी राइट टू हेल्थ का कानून
दरअसल राइट टू हेल्थ का कानून राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार विधानसभा चुनाव से तकरीबन 8 महीने पहले लेकर आई थी. इसमें कैशलेस इलाज समेत तमाम प्रावधान किए गए थे. लोगों को इलाज में काफी फायदा हो रहा था. तमाम लोग इस योजना का लाभ ले रहे थे. यही वजह है कि हेल्थ मिनिस्टर ने जब विधानसभा के सदन में इस योजना को लेकर सवाल उठाए और सरकार के दूसरे मंत्री व बीजेपी के विधायक उनके बचाव में आ गए तो कांग्रेस हमलावर हो गई.
सियासी बदले की भावना से काम कर रही सरकार- गहलोत
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राज्य की मौजूदा भजनलाल शर्मा सरकार पर सियासी बदले की भावना से काम करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राइट टू हेल्थ की योजना उनकी सरकार ने शुरू की है, इस वजह से मौजूदा सरकार उसे खत्म करने की कोशिश कर रही है.
जनता की सेहत से खिलवाड़ न करे सरकार- गहलोत
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा, ”अगर सरकार को सियासी निशाना साधना है तो उनसे बदला लेना चाहिए. सियासी बदला लेने की नीयत से राज्य की आठ करोड़ जनता की सेहत से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.” कांग्रेस के विधायक हरिमोहन शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा सरकार खुद तो कुछ कर नहीं रही है और कांग्रेस के राज में शुरू की गई योजनाओं को बंद करने में लगी हुई है. ऐसा कतई नहीं होने दिया जाएगा और सड़क से लेकर सदन तक इसका विरोध किया जाएगा.
कांग्रेस इस योजना का क्रेडिट लेना चाहती- बीजेपी
दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर बीजेपी की तरफ से बेतुकी दलील सामने आई है. जयपुर शहर से बीजेपी के विधायक गोपाल शर्मा ने कहा, ”मंत्री ने इस तरह का बयान इसलिए दिया क्योंकि कांग्रेस इस योजना का क्रेडिट लेना चाहती है. उनके मुताबिक इस तरह की योजनाओं को लागू करने का क्या फायदा, जिसका क्रेडिट सरकार और सत्ता पक्ष को मिले ही नहीं.”
कानून मंत्री जोगाराम पटेल क्या बोले?
बहरहाल सियासी तकरार के बीच सरकार के कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा, ”राइट टू हेल्थ योजना को बंद किए जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. योजना की समीक्षा की जा सकती है. उसमें और सुधार किया जा सकते हैं, क्योंकि गहलोत सरकार ने सिर्फ सियासी फायदा लेने के लिए इसे जल्दबाजी में लागू किया था. अब देखना यह होगा कि राजस्थान के 8 करोड लोगों को आने वाले दिनों में राइट टू हेल्थ योजना का लाभ मिलता है या फिर सियासी खींचतान में इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है.”



