US ट्रेड डील पर CM उमर अब्दुल्ला का दावा, ‘ड्यूटी फ्री सेब-अखरोट से बर्बाद हो जाएंगे कश्मीरी किसान’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील (व्यापार समझौते) को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. शनिवार को एक सार्वजनिक मंच से केंद्र सरकार को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस समझौते के तहत अमेरिकी बागवानी उत्पादों को भारतीय बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ (बिना आयात शुल्क) प्रवेश दिया गया, तो इसका सीधा और विनाशकारी असर जम्मू-कश्मीर के लाखों किसानों की आजीविका पर पड़ेगा.
मुख्यमंत्री शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST), कश्मीर में आयोजित वार्षिक एग्रीटेक मेले ‘गोंगुल 2026’ में शिरकत करने पहुंचे थे. यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है, लेकिन बिना सुरक्षा उपायों के बाहरी प्रतिस्पर्धा हमारे किसानों को कुचल देगी. उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिका से सेब, अखरोट, बादाम और अन्य सूखे मेवे अगर बिना टैक्स के भारत आए, तो स्थानीय उत्पादों की मांग गिर जाएगी.
किसानों के निवेश पर फिरेगा पानी
उमर अब्दुल्ला ने तर्क दिया कि पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर के किसानों ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर बागों को अपग्रेड किया है. हाई-डेंसिटी (सघन) खेती और कोल्ड स्टोरेज (CA Stores) की सुविधाएं विकसित करने में भारी निवेश किया गया है ताकि उपज लंबे समय तक सुरक्षित रहे. सीएम ने कहा, “अगर ऐसे समय में अच्छी क्वालिटी का विदेशी आयातित माल सस्ते दाम पर बाजारों में भर जाएगा, तो हमारे किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. यह उन किसानों के साथ घोर अन्याय होगा जिन्होंने गुणवत्ता सुधारने के लिए इतना संघर्ष किया है.”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था बचाने की चुनौती
मुख्यमंत्री ने बताया कि हालिया बजट में उनकी सरकार ने टूरिज्म, बागवानी, पशुपालन, मछली पालन और डेयरी पर विशेष जोर दिया है. कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ सेब और अखरोट ही हैं. उन्होंने केंद्र से मांग की है कि स्थानीय उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए विदेशी आयात पर शुल्क में ढील न दी जाए, ताकि बाजार में कश्मीरी उत्पादों को ही सर्वोत्तम दाम मिल सकें.



