कश्मीर: 40 टाउनशिप पर महबूबा का वार, कहा- भीड़ कम करने की आड़ में डेमोग्राफी बदलने की साजिश

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर घाटी में प्रस्तावित 40 नई टाउनशिप की योजना पर कड़ा ऐतराज जताया है. शुक्रवार (13 फरवरी) को एक बयान जारी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इन टाउनशिप का असली मकसद मुस्लिम बहुल कश्मीर की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) को बदलना है. उन्होंने इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की है.
महबूबा मुफ्ती ने अपने आरोपों के समर्थन में कश्मीरी पंडित और बीजेपी नेता अश्विनी कुमार च्रुंगू के एक हालिया साक्षात्कार का जिक्र किया. महबूबा ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “शहरों में भीड़ कम करने के लिए 40 टाउनशिप? यह सुनने में तब तक प्रगतिशील लगता है जब तक कि बीजेपी के लोग इसे हिंदू बस्तियों के लिए ‘डेमोग्राफी प्लान’ न कह दें.”
40 townships in Kashmir to decongest cities?Sounds progressive until BJP voices call it a demography plan for Hindu settlement. Coincidence? Or deliberate state engineering? J&K Govt must clarify before it is too late
Valley demography plan, hear it from BJP as Ashwani Kumar…— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) February 13, 2026
महबूबा मुफ्ती बीजेपी पर उठाया सवाल
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या यह महज इत्तेफाक है या सरकार की जानबूझकर की गई इंजीनियरिंग? घाटी के लिए बीजेपी का क्या प्लान है, यह अश्विनी कुमार च्रुंगू के बयान से साफ है, जो बाहर से लाखों हिंदुओं को बसाने की बात कर रहे हैं. सरकार को देर होने से पहले इस पर सफाई देनी चाहिए.”
क्या है यह टाउनशिप प्रोजेक्ट?
विवाद के केंद्र में 62 किलोमीटर लंबा श्रीनगर रिंग रोड प्रोजेक्ट है, जो प्रधानमंत्री विकास पैकेज (PMDP) का एक प्रमुख हिस्सा है. 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित यह परियोजना पुलवामा, बडगाम, बारामूला, श्रीनगर, गंदेरबल और बांदीपुरा के 52 गांवों को जोड़ती है. सरकार का कहना है कि इन टाउनशिप और रिंग रोड का उद्देश्य श्रीनगर शहर में ट्रैफिक कम करना और खेती व बागवानी के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है.
परियोजना की स्थिति श्रीनगर रिंग रोड का निर्माण एनएचएआई (NHAI) द्वारा ईपीसी मोड में किया जा रहा है.
- फेज-1 (गलांदर से सुंबेल): जून 2025 तक इसका करीब 71.5% काम पूरा हो चुका था और इसे जल्द ही पूरा करने का लक्ष्य है.
- फेज-2 (सुंबेल से वायुल): इसका निर्माण कार्य जारी है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
हालांकि, अब महबूबा मुफ्ती के बयान के बाद यह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट एक बड़े राजनीतिक विवाद में घिरता नजर आ रहा है.



