राज्य

उत्तराखंड: कोटद्वार से हरिद्वार की दूरी होगी कम, लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर SC की रोक हटी

उत्तराखंड के कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है. सुप्रीम कोर्ट ने लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण पर 11 जनवरी 2023 से लगी रोक को संशोधित करते हुए सड़क निर्माण की अनुमति दे दी है. हालांकि, फिलहाल यह अनुमति केवल निजी वाहनों के लिए दी गई है. व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही पर रोक जारी रहेगी, जिसके लिए अलग से अनुमति लेनी होगी.

इस निर्णय से कोटद्वार से हरिद्वार की दूरी लगभग 30 किलोमीटर कम हो जाएगी. साथ ही कोटद्वार और आसपास के करीब 18 गांवों को सीधा सड़क संपर्क मिलने से आवागमन, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में सुविधा मिलेगी.

अदालत में क्यों विचाराधीन था मामला?

प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु के अनुसार, 11.5 किलोमीटर लंबी इस सड़क का लगभग 4.5 किलोमीटर हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरता है. चमरिया मोड़ से सिगड़ी सोट तक का हिस्सा पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. इसी कारण यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था.

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी की थी कि यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों से जुड़ी चिंताओं को जन्म देती है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी वन्यजीवों की आवाजाही और नदी तंत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं.

निजी वाहनों तक सीमित रहेगी अनुमति

राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि व्यावसायिक वाहन इस मार्ग का उपयोग नहीं करेंगे और वे उत्तर प्रदेश के रास्ते संचालित होंगे. पहले सरकार ने प्रतिदिन 150 व्यावसायिक वाहनों को अनुमति देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अब फिलहाल निजी वाहनों तक ही अनुमति सीमित रहेगी.

मामले में किसने क्या कहा?

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कहा, “राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग-चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर उच्चतम न्यायालय ने मेरे इंटरवेशन एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए 2023 से लगे स्टे ऑर्डर को हटा दिया है. यह फैसला कोटद्वार और आसपास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत है.”

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने कहा, “यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कोटद्वार और आसपास के समस्त ग्रामीण अंचलों के लिए जीवनरेखा है. पिछले चार वर्षों से मैं निरंतर इस विषय को लेकर प्रयासरत थी.”

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, “इस मार्ग को अनुमति मिलना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है. अभी निजी वाहनों के लिए अनुमति मिली है. भविष्य में व्यावसायिक वाहनों के संचालन को लेकर भी प्रयास किए जाएंगे.”

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बड़ी उपलब्धि बताया है. वहीं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी भी अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. यदि सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया गया, तो यह मार्ग विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बन सकता है.

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!