पाकिस्तान ने की बेशर्मी की हद पार, राजीव शुक्ला का कथित फर्जी क्लिप किया प्रसारित

भारत-पाकिस्तान के टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले से पहले एक नया विवाद सामने आया है. बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने साफ किया है कि पाकिस्तानी टीवी चैनल पर चलाया गया उनका कथित ऑडियो क्लिप असली नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किया गया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए राजीव शुक्ला ने कहा कि वायरल वीडियो में जो आवाज सुनाई दे रही है, वह उनकी नहीं है. उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे भ्रामक कंटेंट पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसी को भी ऐसी फेक वीडियो शेयर की जाती है तो उसकी तुरंत रिपोर्ट की जानी चाहिए.
पाकिस्तानी शो में चलाया गया क्लिप
यह विवाद उस समय बढ़ा जब एक पाकिस्तानी क्रिकेट शो में, जिसे पूर्व क्रिकेटर शोएब मलिक होस्ट करते हैं, एक वीडियो क्लिप प्रसारित की गई. यह कार्यक्रम ‘एआरवाई न्यूज’ चैनल पर दिखाया गया था. शो में दावा किया गया कि क्लिप में राजीव शुक्ला भारत-पाकिस्तान मैच के मुद्दे पर पाकिस्तान के यू-टर्न को लेकर बयान दे रहे हैं.
The video circulating with altered, AI-generated audio in my name is fake. @realshoaibmalik, @ARYNEWSOFFICIAL and @Salman_ARY, please stop circulating this misleading content.
For reference, here is my original video. https://t.co/bi0ZA6tkTJ
— Rajeev Shukla (@ShuklaRajiv) February 11, 2026
वायरल वीडियो में एक ऐसी आवाज सुनाई देती है जो शुक्ला से मिलती-जुलती है. उस ऑडियो में कहा गया कि AI के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान को भारत के खिलाफ खेलने के लिए राजी किया गया और यह खेल के हित में लिया गया फैसला है.
असली बयान क्या था?
हालांकि, शुक्ला ने स्पष्ट किया कि यह ऑडियो बदला गया है. उन्होंने बताया कि उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में ICC के प्रयासों की सराहना की थी, जिसने दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराई. उनका असली बयान इस बात पर केंद्रित था कि आपसी सहमति से समाधान निकालना क्रिकेट के हित में है. शुक्ला के अनुसार, उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर एआई तकनीक से अलग रूप दिया गया, जिससे गलत संदेश फैलाया जा सके.
एआई के दुरुपयोग पर चिंता
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह भ्रम फैला सकता है. डिजिटल दौर में ऑडियो और वीडियो की सच्चाई पहचानना मुश्किल होता जा रहा है.



