दिल्ली: ’15 दिनों में फैसला नहीं तो…’, ऑटो-टैक्सी चालक यूनियन ने केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठी

दिल्ली में ऑटो और टैक्सी चालकों की समस्याएं एक बार फिर सतह पर आ गई हैं. राष्ट्रीय ड्राइवर संयुक्त मोर्चा समिति ने केंद्र सरकार के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को कड़ा आक्रोश पत्र भेजते हुए दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की नीतियों को चालकों के लिए विनाशकारी बताया है. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल शुरू की जाएगी.
दिल्ली समेत देश भर के संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर ऑटो टैक्सी चालकों के हितों हेतु एकमत होकर ऐलान किया है कि अगर 15 दिनों के अंदर संगठन की मांगों को नहीं माना गया तो दिल्ली समेत देश भर के ऑटो टैक्सी चालक 23 फरवरी 2026 को 1 दिन की सांकेतिक हड़ताल करेंगे.
‘गलत नीतियों से भुखमरी की स्थिति’
संगठन का आरोप है कि दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों की गलत नीतियों के कारण राजधानी के ऑटो-टैक्सी चालक भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं. चालकों की शिकायत है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है और हर स्तर पर उन्हें अपमान और दबाव का सामना करना पड़ता है.
फिटनेस जांच फीस में चोरी-छुपे बढ़ोतरी का आरोप
आक्रोश पत्र में कहा गया है कि नवंबर 2025 के अंत में बिना किसी अधिसूचना के ऑटो-टैक्सी वाहनों की फिटनेस जांच फीस में 800 रुपये की वृद्धि कर दी गई. इसके साथ ही वाहन फेल होने पर दोबारा जांच फीस में 600 रुपये का इजाफा किया गया. संगठन का कहना है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में भी ऐसी ही बढ़ोतरी की गई थी, जिसे बाद में एनआईसी की गलती बताकर वापस लिया गया था.
नए साल में फिर बढ़ी फीस, संगठन नाराज
संगठन के अनुसार 5 जनवरी की शाम को एक बार फिर बिना किसी आधिकारिक सूचना के फिटनेस जांच फीस में 800 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई. इसे वाहन कैटेगरी को लेकर बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला बताते हुए संगठन ने तत्काल प्रभाव से इसे वापस लेने की मांग की है.
एग्रीगेटर कंपनियों को छूट, चालकों पर सख्ती
राष्ट्रीय ड्राइवर संयुक्त मोर्चा समिति ने आरोप लगाया कि 2 जनवरी 2026 को दिल्ली सरकार ने ऑटो-टैक्सी संगठनों को बुलाने के बजाय ओला, उबर और रैपिडो जैसी मोबाइल ऐप कंपनियों के साथ बैठक कर निजी कारों को सवारी ढोने की अनुमति दी. संगठन का सवाल है कि जब निजी वाहन सवारी ढो सकते हैं तो कमर्शियल वाहनों पर इतने सख्त नियम और पाबंदियां क्यों.
चालान, जब्ती और उत्पीड़न का दर्द
चालकों ने बताया कि कभी खाना खाते समय चालान, कभी सवारी के इंतजार में चालान और कभी जबरन फोटो खींचकर चालान काटे जाते हैं. इसके अलावा परिवहन विभाग की एनफोर्समेंट टीम द्वारा बिना कारण वाहन जब्त किए जाते हैं, जिनकी रिहाई के लिए भारी जुर्माना और शुल्क देना पड़ता है.
संगठन का कहना है कि ऑटो-टैक्सी चालक सिर्फ अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए सड़कों पर मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें मारपीट, गाली-गलौज और शोषण झेलना पड़ता है. क्या ऑटो-टैक्सी चालक भारत के नागरिक नहीं हैं और क्या संविधान में उनके लिए कोई जगह नहीं है.
परमिट सरेंडर और मुआवजे की मांग
संगठन ने मांग की है कि यदि सरकार ऑटो-टैक्सी चालकों का रोजगार सुरक्षित नहीं कर सकती तो उनके परमिट सरेंडर कर कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. इससे प्रवासी चालक किसी अन्य राज्य में वैकल्पिक रोजगार कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें.
ई-रिक्शा और निजी वाहनों पर सवाल
आक्रोश पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली की 236 सड़कों पर ई-रिक्शा प्रतिबंधित हैं, फिर भी बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लाइसेंस लाखों ई-रिक्शा बेखौफ चल रहे हैं. यहां तक कि लुटियंस जोन और इंडिया गेट क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं. संगठन का दावा है कि ई-रिक्शाओं की वजह से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और ऑटो-टैक्सी चालकों का रोजगार खत्म हो रहा है.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
राष्ट्रीय ड्राइवर संयुक्त मोर्चा समिति ने साफ किया है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर फिटनेस जांच फीस बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई और निजी नंबर के वाहनों से सवारी ढोने पर रोक नहीं लगी तो संगठन मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल करेगा. किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की होगी.



