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बिहार में शिक्षकों के तबादले में लापरवाही पर MLC जीवन कुमार ने सरकार को घेरा, जानें क्या कहा?

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा 2024 और 25 में तीन चरणों में करीब 2 लाख 27 हजार शिक्षकों की नियुक्ति पहले की जा चुकी है.  तो करीब 41 हजार प्रधान शिक्षकों की भी बहाली हुई है.  बहाली के बाद सरकार ने शिक्षकों को तबादले भी किया है. लेकिन कई विसंगतियों को लेकर एक एक बार फिर विधानमंडल के बजट सत्र में शिक्षकों की तबादले  पर बहस शुरू हो गई है.  

शिक्षकों के मुद्दे पर बीजेपी के गया स्नातक निर्वाचन से क्षेत्र से निर्वाचित एमएलसी जीवन कुमार ने उठाया है और कहा है कि शिक्षा विभाग प्रधान शिक्षकों के तबादले में लापरवाही बरती है. जब गृह जिले और पास के जिलों में इतनी ज्यादा पद खाली है फिर 100 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक शिक्षकों को क्यों दूर किया जा रहा है .

गृह जिले से दूरी और विभागीय नियमों की अनदेखी का आरोप

कल गुरुवार (06 फरवरी) को बिहार विधान परिषद बीजेपी एमएलसी जीवन कुमार ने  बीपीएससी  द्वारा नवनियुक्त प्रधानाध्यापकों की समस्याओं को उठाते हुए  सरकार से मांग किया कि अपने गृह प्रमंडल या जिले से 100 से 500 किलोमीटर दूर पदस्थापित प्रधानाध्यापकों का तबादला उनके गृह जिले या निकटतम जिलों में किया जाए .उन्होंने कहा कि 14 जनवरी 2026 को 896 प्रधानाध्यापकों के स्थानांतरण की सूची जारी की गई, लेकिन इसमें विभागीय नियमों की अनदेखी हुई है .

उन्होंने आरोप लगाया कि पदस्थापन में “पति-पत्नी के आधार पर” मिलने वाले लाभ का पालन नहीं किया गया, जिससे बड़ी संख्या में महिला, दिव्यांग और गंभीर रोगों से ग्रसित शिक्षक परेशान हैं .

खाली पदों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में पदस्थापन पर तर्क

MLC जीवन कुमार ने तर्क दिया कि राज्य के हजारों राजकीयकृत और प्रोजेक्ट माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद खाली पड़े हैं . यदि इन विद्यालयों में स्थानांतरण किया जाए, तो अधिकांश प्रधानाध्यापकों को उनके गृह जिला या निकटतम जिला आवंटित हो सकेगा .

शिक्षा मंत्री का जवाब: सॉफ्टवेयर और मेरिट के आधार पर प्रक्रिया

हालांकि इस पर सदन में एमएलसी जीवन कुमार के उठाए गए सवाल पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन को बताया कि प्रधानाध्यापकों का आवंटन मेरिट और चॉइस के आधार पर सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा है.शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि वर्तमान में ई-शिक्षा कोष के माध्यम से विकल्पों की मांग की जा रही है और प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है .भविष्य में विभाग समीक्षा के बाद नई स्थानांतरण नीति अधिसूचित करेगा .इसके तहत उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर प्रधानाध्यापकों को राजकीय और प्रोजेक्ट विद्यालयों में भी स्थानांतरित करने पर कार्रवाई की जाएगी .वहीं इस मुद्दे पर सभापति ने सरकार को आवश्यक निर्देश देते हुए शिक्षकों की परेशानियों को गंभीरता से लेने को कहा है.

प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति और जिला आवंटन की वर्तमान स्थिति

बताते चले की जुलाई 2025 में  शिक्षा विभाग द्वारा  बीपीएससी परीक्षाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों की बहाली की गई . 5,728 प्रधानाध्यापक (प्लस-2 विद्यालय) और 35,333 प्रधान शिक्षक (प्राथमिक विद्यालय) नियुक्त किए गए हैं, इन  प्रधानाध्यापक को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में  नियुक्ति हुई है, जिनका जिला आवंटन भी उसी वक्त कर दिया गया था, लेकिन प्रधानाध्यापक को विद्यालय आवंटन इतना ज्यादा दूर कर दिया गया है.

जैसे अगर कोई पटना का रहने वाला है तो उसे पश्चिम चंपारण किया गया है, सासाराम का रहने वाले को किशनगंज किया गया है इतनी दूरी होने के कारण प्रधानाध्यापक काफी परेशानियों में जूझ रहे हैं. इसको लेकर जीवन कुमार ने सदन में इस बात को उठाया .

AZMI DESK

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