इस्लामाबाद मस्जिद हमले के खिलाफ कश्मीर में फूटा गुस्सा, पाकिस्तान के खिलाफ हुआ प्रदर्शन

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार (06 फरवरी) को एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले की गूंज कश्मीर घाटी में साफ सुनाई दे रही है. इस हमले में 31 नमाज़ियों की मौत और 170 से अधिक लोगों के घायल होने के विरोध में कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन जारी रहे.
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया. बारामूला और बांदीपोरा के कई इलाकों में स्थानीय लोग ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और अयातुल्ला खुमैनी की तस्वीरों वाले प्लेकार्ड लेकर सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान और इजरायल विरोधी नारे लगाते हुए कहा कि बेगुनाह नमाज़ियों को निशाना बनाना कायराना हरकत है.
‘मस्जिद के बजाय फिलिस्तीन में जाकर लड़ें’
विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर इन हमलावरों को लड़ना ही है, तो वे फिलिस्तीन, यमन और सीरिया जैसे क्षेत्रों में जाकर लड़ें, जहाँ मुसलमान वास्तव में जुल्म का शिकार हो रहे हैं. बेगुनाह नमाज़ियों की हत्या इस्लाम विरोधी है.
हमले की जिम्मेदारी ISPK ने ली
जिहादी समूहों पर नज़र रखने वाले ‘SITE इंटेलिजेंस ग्रुप’ के अनुसार, इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (ISPK) ने ली है. संगठन ने बयान जारी कर स्वीकार किया कि उनके आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक जैकेट के जरिए तरलाई स्थित खदीजतुल कुबरा मस्जिद के भीतर शिया जमात को निशाना बनाया.
राजधानी में 2008 के बाद सबसे बड़ा हमला
यह धमाका इस्लामाबाद के इतिहास के सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है. 2008 में हुए मैरियट होटल बम धमाके के बाद राजधानी में यह अब तक का सबसे बड़ा और खौफनाक हमला है, जिसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कैंडल मार्च और एकजुटता
बांदीपोरा के इंदरकूट और बारामूला के पट्टन इलाके में शुक्रवार (6 फरवरी) रात से ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने की मांग की.



