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‘पॉप्युलैरिटी बटौरने SC आ गए, लगता है सत्ता मिल जाती तो…’, प्रशांत किशोर की पार्टी की याचिका पर CJI की सख्त टिप्पणियां जरूर पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें बिहार चुनाव को चुनौती दी गई थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को सख्त लहजे में कहा कि लोगों ने आपको वोट नहीं दिए तो आप पॉप्युलेरिटी के लिए कोर्ट आ गए. सीजेआई ने यह भी कहा है कि अगर ये पार्टी सत्ता में हो तो ये भी वही करेगी. कोर्ट ने कहा कि याचिका में पूरे चुनाव को चुनौती दी गई है, जिस पर वह सुनवाई नहीं कर सकता है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठा सकते हैं. बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की रिट पीटीशन में पूरे चुनाव को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने के लिए व्यापक आदेश देने की मांग की गई है. कोर्ट ने कहा कि याचिका में हर कैंडिडेट के खिलाफ चुनाव प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से संबंधित उचित आरोप होने चाहिए और इसका सही तरीका ये है कि हर निर्वाचन क्षेत्र को लेकर याचिकाएं दाखिल की जाएं.

सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और पूछा, ‘आपकी पार्टी को कितने वोट मिले थे? अगर लोगों ने आपको रिजेक्ट कर दिया, तो आप पॉप्युलेरिटी बटौरने के लिए कोर्ट आ गए.’ सीजेआई ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को मुफ्त योजनाओं को चुनौती देनी चाहिए थी. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि याचिका में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का मुद्दा उठाया गया है, उस पर विचार किया जा सकता है.

जन सुराज पार्टी की तरफ से सीनियर एडवोकेट चंदर उदय सिंह कोर्ट में पेश हुए, उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है. आचार संहिता लागू होने के बावजूद 25-35 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए. चुनाव से ठीक पहले योजना का ऐलान किया गया. याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसी योजनाएं शुरू करने के लिए सत्ताधारी दल के लिए कम से कम छह महीने की समय सीमा निर्धारित करे क्योंकि ऐसी योजनाएं चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं.

सीजेआई ने इस दलील पर कहा कि याचिकाकर्ता ने स्कीम को नहीं चुनाव को चुनौती दी है और इसे रद्द करने की मांग करते हुए फिर से चुनाव कराने की मांग की है. सीजेआई ने कहा, ‘फ्रीबीज के मुद्दे को हम पहले से ही गंभीरता से देख रहे हैं. हम भी इस मुद्दे पर विचार करना चाहेंगे, लेकिन उस पार्टी के कहने पर नहीं जो चुनाव हार चुकी है और फिर भी चाहती है कि… अगर ये पार्टी सत्ता में आती है तो, ये भी वही करेगी.’

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं, वह इस पर विचार कर सकता है, ये पूरे देश का मुद्दा नहीं है. याचिकाकर्ता ने आर्टिकल 32 के तहत रिट पीटीशन दाखिल करके यह घोषणा करने की मांग की थी कि आचार संहिता के दौरान लाखों महिला वोटर्स के खातों में पैसे ट्रांसफर करना संविधान के आर्टिकल 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है. 

AZMI DESK

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