GHMC में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, अधीक्षण अभियंता ने बिल पास करने के लिए मांगी थी 15 लाख की रिश्वत, ACB ने रंगेहाथों पकड़ा

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के इंजीनियरिंग विंग में भ्रष्टाचार का यह आलम है कि बिल पास कराने के लिए 10 प्रतिशत कमीशन एक खुला रहस्य बन चुका था. मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने कुकटपल्ली जोन के अधीक्षण अभियंता (SE) चिन्ना रेड्डी को रंगेहाथ गिरफ्तार किया. वे 1.40 करोड़ रुपये के एक बिल को मंजूरी दिलाने के एवज में 15 लाख रुपये की रिश्वत ले रहे थे. इस दौरान उनके साथ एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी मौजूद था, उसे भी एसीबी ने हिरासत में ले लिया है.
ठेकेदार से लिए गए रिश्वत के नोट को जेब में ठूंसते पकड़ाए अधिकारी
घटनास्थल पर जो दृश्य देखने को मिला, वह किसी भी नागरिक के लिए बेहद शर्मनाक है. GHMC का यह वरिष्ठ अधिकारी एक ठेकेदार से पैसे गिनते और उसे अपनी जेब में ठूंसते हुए पकड़ा गया. यह मामला इंजीनियरिंग विंग में फैली गहरी सांठगांठ को उजागर करता है, जहां बिल्स को क्लियर कराने के लिए एक तय प्रतिशत तय हो गया था.
सूत्रों के अनुसार, चिन्ना रेड्डी पिछले काफी समय से ठेकेदारों पर बिल रोकने का दबाव बनाकर अवैध वसूली कर रहे थे. शिकायत मिलने के बाद ACB ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई और कामयाबी हासिल की.
शहर के विकास कार्यों में प्रभावित कर रहे भ्रष्टाचार के मामले
पिछले कुछ समय में GHMC का इंजीनियरिंग विभाग भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे आगे रहा है. अधिकारियों की ओर से ठेकेदारों को बंधक बनाकर रखा जाता है और काम पूरा होने के बाद भी भुगतान के लिए मोटी रकम की मांग की जाती है. यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता को खत्म करती है बल्कि शहर के विकास कार्यों को भी प्रभावित करती है. ACB ने मौके से नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और आरोपियों से गहनता से पूछताछ की जा रही है.
मामले में अन्य अधिकारियों की साझेदारी की हो रही जांच
यह घटना एक कड़वा सच सामने लाती है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग किस हद तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. ACB ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस मामले में और भी बड़े अधिकारी शामिल हैं. GHMC के अन्य अधिकारियों के लिए यह एक चेतावनी की घंटी है कि भ्रष्टाचार करने वालों को कोई नहीं बख्शेगा.
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