ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का एक्शन, अजनारा होम्स पर लगाया 54 लाख रुपये का जुर्माना

पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सेक्टर-16बी स्थित अजनारा होम्स (एपीवाई रियल्टी) सोसाइटी पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का संचालन न करने, भूजल का अवैध दोहन करने और कचरा प्रबंधन में लापरवाही बरतने के आरोप में कुल 54.32 लाख रुपये की भारी पेनल्टी लगाई गई है. साथ ही, प्राधिकरण ने बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भी लिखा है.
प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत सीवर विभाग की टीम ने अजनारा होम्स का दौरा किया. वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पाया कि सोसाइटी का एसटीपी पूरी तरह बंद था. निवासियों ने शिकायत की कि पिछले दो वर्षों से एसटीपी का संचालन नहीं हो रहा है.
जांच में सामने आई मुख्य कमियां
अशोधित सीवेज का बहाव: सोसाइटी के 2300 फ्लैटों से निकलने वाला लगभग 1.15 एमएलडी सीवेज बिना शोधित किए नालियों में गिराया जा रहा था. नाली चोक होने पर इस गंदे पानी को बेसमेंट में भी छोड़ा गया, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है. बागवानी और उद्यान कार्यों के लिए शोधित पानी के बजाय अवैध रूप से भूजल (Groundwater) का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो एनजीटी (NGT) के आदेशों का उल्लंघन है. स्वास्थ्य विभाग ने पाया कि सोसाइटी में कचरे का उचित निपटान नहीं हो रहा है, जिसके लिए 4.32 लाख रुपये का अलग से जुर्माना लगाया गया.
प्राधिकरण की सख्त चेतावनी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली सोसाइटियों को बख्शा नहीं जाएगा. अजनारा होम्स को जुर्माने की राशि 7 कार्यदिवस के भीतर जमा करने का आदेश दिया गया है. प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा ऐसी लापरवाही पाई गई, तो लीज की शर्तों के तहत आवंटन निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है.
प्राधिकरण ने शहर की सभी 202 बिल्डर सोसाइटियों को नोटिस जारी कर एसटीपी के सुचारू संचालन और शोधित पानी के पुनः उपयोग (Reuse) पर जवाब मांगा है.



