करौली जमीन आवंटन पर हंगामा, कांग्रेस विधायक घनश्याम बोले, ‘श्मशान की जमीन पर BJP कार्यालय’

राजस्थान विधानसभा में आज (4 फरवरी 2026) को कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने करौली में जमीन आवंटन के मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव के जरिए अपनी बात रखी. मेहर ने कहा कि करौली जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट परिसर के सामने लगभग तीन बीघा जमीन एक राजनीतिक दल को आवंटित करने की तैयारी चल रही है और इस मामले में मास्टर प्लान की अनदेखी भी हो रही है. जिस जमीन के आवंटन की बात हो रही है उसका मास्टर प्लान में उपयोग श्मशान और कब्रिस्तान के लिए दिखाया गया है.
बीजेपी कार्यालय के लिए श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन का आवंटन
घनश्याम मेहर ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए सदन में उस विज्ञापन की कॉपी को हवा में लहराया, जिसमें इस आवंटन के प्रस्ताव पर आपत्तियां मांगी गई है. इसके बाद विधानसभा से बाहर निकलते ही घनश्याम मेहर ने मीडिया से बात में कहा कि यह आवंटन बीजेपी को किया जा रहा है और इसमें मास्टर प्लान की अनदेखी हो रही है.
विधायक ने हवाले में बताया कि जो आपत्ति मांगने के लिए विज्ञापन नगर परिषद की तरफ से जारी किया गया, उसमें भी साफ लिखा है कि मास्टर प्लान में इस जमीन का इस्तेमाल श्मशान और कब्रिस्तान के लिए प्रस्तावित है. साथ ही उसमें यह भी लिखा गया है कि अब इसका वांछित भू उपयोग बीजेपी के कार्यालय के लिए आवंटन में किया जा रहा है और यह संस्थानिक आवंटन की श्रेणी में आता है.
‘शमशान या कब्रिस्तान में ही अपना ऑफिस बनाने हो, तो उनकी इच्छा’- घनश्याम मेहर
घनश्याम मेहर ने सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग की और कहा कि श्मशान या कब्रिस्तान की तीन बीघा जमीन बीजेपी कार्यालय के लिए आंवटित की जा रही है. उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर फिर भी अगर किसी पार्टी को शमशान या कब्रिस्तान में ही अपना ऑफिस बनाने की मंशा है तो, वह उन लोगों की इच्छा है.
इसके बाद से करौली जिला मुख्यालय की इस प्राइम लोकेशन की जमीन को लेकर सियासी पारा भी चढ़ते जा रहा है. जहां कांग्रेस इसे श्मशान या कब्रिस्तान की धार्मिक और सार्वजनिक इस्तेमाल की जमीन बता रही है, जिस पर बीजेपी के कब्जे का आरोप लगाया गया है. वहीं दूसरी तरफ से बीजेपी इस मामले में चुप है और अब तक कोई विस्तृत सफाई भी नहीं आई है.



