I-PAC रेड मामले में ईडी की याचिका पर टली सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने दी 7 दिन बाद की तारीख

पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक पर रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को सुनवाई 10 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है. सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार ने कोयला चोरी घोटाले के संबंध में आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के परिसर में तलाशी अभियान में बाधा डाली.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले में हलफनामे दाखिल किए हैं और समय मांगा है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले को स्थगित कर दिया.
15 जनवरी को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की इस दलील पर चिंता जताई कि सीएम ने जांच में बाधा डालने की कोशिश की. कोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताया था. कोर्ट ने इस बात की जांच करने पर भी सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं. कोर्ट ने आठ जनवरी को आई-पैक के परिसर पर छापा मारने वाले एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकियों पर भी रोक लगा दी थी.
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगाते हुए राज्य पुलिस को छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का भी निर्देश भी दिया था. कोर्ट ने ईडी की उन याचिकाओं पर ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी राजीव कुमार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जिनमें आई-पैक परिसर में छापेमारी में बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का अनुरोध किया गया था.
ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि तलाशी स्थल पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति और दस्तावेजों को हटाए जाने से अधिकारियों पर डराने वाला प्रभाव पड़ा और इससे जांच एजेंसी की अपने वैधानिक कार्यों को स्वतंत्र रूप से निर्वहन करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई.
आठ जनवरी को ईडी ने आई-पैक के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी. ईडी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बंगाल पुलिस अधिकारियों के साथ वहां पहुंचीं और उन्होंने जांच रोक दी. ईडी का यह भी आरोप है कि ममता बनर्जी ने उनसे दस्तावेज अपने साथ लेकर वहां से चली गई थीं.



