जगन मोहन रेड्डी ने जिस केस में चंद्रबाबू नायडू को कराया था गिरफ्तार, उसमें ED ने आंध्र CM को दी क्लीन चिट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार (2 फरवरी, 2026) को आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (APSSDC) सीमेंस प्रोजेक्ट घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू क्लीन चिट दे दी है. ईडी ने कहा कि उसकी जांच में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग करने के कोई सबूत नहीं पाए गए. इसलिए उन्होंने इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है.
ईडी की हैदराबाद जोनल टीम ने आंध्र प्रदेश कौशल विकास मामले से जुड़े सीमेंस घोटाले में डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (DTSPPL) और उससे जुड़े आरोपियों के खिलाफ विशाखापत्तनम की विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिस पर 28 जनवरी, 2026 को संज्ञान लिया जा चुका है.
YSRCP सरकार ने नायडू को कराया था गिरफ्तार
YSRCP के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की पूर्व सरकार के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सितंबर 2023 में इस मामले में चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था. जिसमें नायडू पर आरोप लगाए गए थे कि इस योजना में अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. ऐसे में तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने राजामहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में 50 से ज्यादा दिन कैद में बिताए थे. इसके बाद आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट ने उन्हें 31 अक्टूबर, 2023 को जमानत दे दी थी.
क्या था APSSDC सीमेंस घोटाला?
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इस मामले में आरोप था कि सीमेंस प्रोजेक्ट के तहत राज्य सरकार की ओर से कौशल विकास के लिए आवंटित धन को अन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए डायवर्ट किया गया था, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ था. जानकारी के मुताबिक, यह आंकड़ा करीब 300 करोड़ रुपये का है.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जब ईडी ने इस घोटाला मामले में अपनी जांच शुरू की, तो इस बात का खुलासा हुआ कि डिजाइनटेक सिस्टम्स के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) विकास विनायक खानवेलकर, सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया के पूर्व MD सौम्याद्री शेखर बोस उर्फ सुमन बोस और उनके सहयोगियों ने सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया.
ईडी के मुताबिक, इस घोटाले में शेल कंपनियों और निष्क्रिय फर्मों के जरिए जटिल वित्तीय लेनदेन किए गए, फर्जी बिल बनाकर सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति दिखाई गई और एंट्री ऑपरेटरों के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई.
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