पिता भी रहे राजनेता, 1985 में अजित पवार से शादी, अब बनीं डिप्टी CM, ऐसा रहा सुनेत्रा पवार का सियासी सफर

एनसीपी के दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार (31 जनवरी) को मुंबई में एक समारोह में महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. मराठवाड़ा क्षेत्र के धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद) जिले के तेर गांव से ताल्लुक रखने वालीं सुनेत्रा पवार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं. अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के पिता भी राजनेता थे. सुनेत्रा पवार का मायके पॉलिटिक्स में काफी सक्रिय रहा. अजित पवार से शादी करने से पहले तक वह सुनेत्रा पाटिल थीं.
1985 में सुनेत्रा की हुई अजित पवार से शादी
1985 में उन्होंने अजित पवार से शादी की. सुनेत्रा के पिता बाजीराव पाटिल एक प्रभावशाली स्थानीय नेता थे और उनके भाई भी कई राजनीतिक पदों पर रहे. इसके बावजूद भी शादी के बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी और परिवार को संभाला.
पर्दे के पीछे अजित पवार के सलाहकारों में शामिल!
सुनेत्रा पवार के दो बेटे हैं, पार्थ पवार और जय पवार. कार्यकर्ता मानते हैं कि सुनेत्रा पर्दे के पीछे अजित पवार के अहम सलाहकारों में शामिल रहीं. 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को हासिल किया, तब पवार फैमिली में हालात बदल गए.
2024 में सुनेत्रा पवार ने सक्रिय राजनीति में रखा कदम
2024 में सुनेत्रा पवार ने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. उनका मुकाबला ननद सुप्रिया सुले से था. सुप्रिया सुले शरद पवार की बेटी हैं और रिश्ते में अजित पवार की चचेरी बहन हैं. इस चुनाव में सुनेत्रा पवार को 1.5 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा. जिसके बाद अजित पवार ने सुनेत्रा पवार को राजसभा की राह दिखाई. सुनेत्रा परिवार 62 साल की हैं और अचानक अपने पति के दिवंगत होने के बाद अब डिप्टी सीएम बनने के साथ ही एनसीपी के नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी भी उन्हें मिली है.
पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने को लेकर किया काम
कॉमर्स विषय में पढ़ाई करने वालीं सुनेत्रा पवार को चित्रकारी, संगीत, फोटोग्राफी और कृषि में रुचि रही. साल 2010 में उन्होंने ‘एंवायरनमेंट फोरम ऑफ इंडिया’ (EFOI) की स्थापना की. यह एक गैर-सरकारी संगठन है जो पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील समुदायों के लोगों के लिए काम करता है. उन्होंने निर्मल ग्राम अभियान के तहत महाराष्ट्र के 86 गांवों में स्वयं-सहायता समूह आंदोलन का नेतृत्व किया, और बारामती के काटेवाडी गांव को ‘इको-विलेज’ में बदलकर स्वच्छता, स्वास्थ्य, सामुदायिक पशुपालन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा दिया.



