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यूपी: गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर बड़ा एक्शन, जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के बांदा में जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव को कारागार प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है. आरोप है कि कोर्ट के  आदेश के विपरीत विक्रम यादव ने गैंग्स्टर रवि काना को रिहा कर दिया. जिस पर गौतमबुद्ध नगर CJM कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्टीकरण मांगा था. मामला तूल पकड़ने के बाद प्राथमिक जांच में निलंबन की कार्रवाई हुई है.

महानिदेशक जेल पीसी मीना ने निलंबन के आदेश जारी करते हुए जेल अधीक्षक की घोर लापरवाही मानी है. विक्रम सिंह यादव पर यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत की गई है, जिसमें विभागीय जांच के साथ निलंबन शामिल है. इस कार्रवाई से बांदा जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया है.

क्या है पूरा मामला ?

बता दें कि गौतमबुद्ध नगर CJM कोर्ट में आरोपी रवि काना को बी-वारंट पर 29 जनवरी को वीडियो कांफ्रेसिंग से पेश किया गया था. कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 तक रवि काना की रिमांड मंजूर की.लेकिन जेल प्रशासन ने पुलिस गार्ड न मिलने का हवाला देकर शाम 6:39 बजे रवि काना को रिहा कर दिया. जबकि वारंट की सूचना ईमेल/ व्हाट्सएप पर 6:42 पर पहुंच गयी थी. इस पर CJM ने लापरवाही मानते हुए जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण माँगा और आरोपी की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए.

जेल प्रशासन ने जांच के बाद किया निलंबित

जेल प्रशासन की लापरवाही का मामला लखनऊ तक गूंज गया था. जिस पर महानिदेशक जेल पीसी मीना ने प्रारंभिक रूप से जेल अधीक्षक की लापरवाही माना और उन पर  उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत की गई है.

निलम्बन आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव ने कर्तव्य पालन में चूक की है. जिसके परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित किया गया. निलंबन अवधि में उन्हें वित्तीय संहिता खंड-2, भाग-2 के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि मिलेगी, लेकिन महंगाई भत्ता या अन्य भत्ते नहीं. यदि कोई अन्य सेवा/व्यवसाय में लगे होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया तो भत्ता रोका जा सकता है.

Input By : अभय यादव

AZMI DESK

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